Tuesday, 13 March 2018

कच्छ भुज


कोटेश्वर में महादेव का मंदिर--- 

कोटेश्वर महादेव मंदिर गुजरात के लखपत तालुका में कच्छ जिले में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है ।  नारायण सरोवर से 4 किमी की दूरी पर है। कोटि शब्द का एक अर्थ 1000 है। यहाँ 1000 शिवलिंग थे इसलिए इस स्थल का नाम कोटेश्वर पड़ा है



हमीरसार झील
यह मानव निर्मित हमीरसार झील 450 साल पुरानी हैं। पूर्वी भाग में रंग-बिरंगा उद्यान बना हुआ है,



आइना महल

 18 वीं शताब्दी के दौरान बनाया  आइना महल भारत और यूरोपीय शैली का एक मिश्रित रूप है,  महल के चित्रों को राम सिंह मलम नामक के एक कलाकार ने बनाया था। 2001 में आए भूकंप के दौरान महल लगभग पूरा नष्ट हो गया था 




भूकंप के कुछ दिन बाद का चित्र


कच्छ संग्रहालय -इसकी स्थापना 1 जुलाई 1877 को हुई थी। भुज शहर के हमीरसर झील के किनारे स्थित है





लखपत-- नारायण सरोवर मंदिर--- कच्छ में नारायण सरोवर भारत के पाँच पवित्र तालाबों में से एक है। इस स्थान पर श्री त्रिकमरायजी, लक्ष्मीनारायण, गोवर्धननाथजी, द्वारकानाथ, आदिनारायण, रणछोड़रायजी और लक्ष्मीजी के मंदिर हैं। महाराज श्री देशलजी की रानी ने इन मंदिरों का निर्माण कराया था।



कोटेश्वर में महादेव मंदिर एक और झलक



जैसलमेर

जैसलमेर झीलों, मंदिरों, हवेलियों ,थार रेगिस्तान के सुनहरे टीलों ,और सुनहरे पीले रंग के बलुआ पत्थरों से सजा हुआ स्वर्ण नगरी है।


जैसलमेर का ‘सोनार किला’  -1156 में निर्मित, तिरुकुटा पहाड़ी पर स्थित, यह किला राव जैसल द्वारा बनाया गया था, इस किले को ‘सोनार किला’ या ‘स्वर्ण किले’ के नाम से भी जाना जाता है और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में से एक है।


बादल विलास महल

जैन मंदिर

-जैसलमेर के किले में स्थित, जैन मंदिर ऋषभदेवजी और शंभदेवदेव जी को समर्पित हैं,



नथमल की हवेली

- इस हवेली की उत्पत्ति 19वीं शताब्दी के अंत में हुई पहली मंजिल में कुछ सुंदर पेंटिंग हैं जो 1.5 किलोग्राम सोने की पत्ती का उपयोग करके बनाई गई हैं।



सलीम सिंह की हवेली 

हवेली लगभग 300 साल पुरानी है हवेली में 38 सुंदर नक्काशीदार बालकनियाँ हैं।



गडीसर झील- महाराजा महारावल गादी सिंह ने 1400 ईस्वी में गडीसर झील का निर्माण कराया था



ताज़िया टॉवर

ताज़िया टॉवर- यह 5 मंजिला का एक टॉवर है ताज़िया टॉवर विभिन्न मुस्लिम इमामों के मकबरे की प्रतिकृति है


पटवों की हवेली- का अन्दर का दृश्य



पटवों की हवेली

पटवों की हवेली  5 हवेली का एक समूह है पाँचों हवेली 19 वीं शताब्दी में 60 वर्षों के भीतर पूरे हुए थे।



बादल विलास महल 

बादल विलास महल का निर्माण 1830 ई. में महारावलों के निवास हेतु किया गया था  


बादल विलास महल

अमर सागर झील- 7 किमी की दूरी पर स्थित है। अमर सागर झील और महल के इस परिसर में एक पुराने शिव मंदिर के साथ विभिन्न तालाब और कुएं शामिल हैं।

सैंड ड्यून्स-जैसलमेर से लगभग 40-42 किलोमीटर की दूरी पर हैं

लोद्रवा , चंद्रप्रभु मंदिर ,शांतिनाथ मंदिर, कुलधरा गांव के पास स्थित खाबा किला, व्यास छत्री दर्शनीय स्थल हैं।

दार्जिलिंग

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