Thursday, 22 June 2017

धर्म क्षेत्र-- कुरुक्षेत्र

कुरुक्षेत्र वैदिक काल से ही तीर्थ यात्रियों  की   पसंद रहा है महाभारत काल मैं इस जगह पे भगवान् कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था महाभारत का युद्ध भी यही हुआ था कुरु राजा के नाम पर इस का नाम कुरुक्षेत्र पड़ा

ब्रह्म  सरोवर
राजा कुरु ने इस सरोवर को ठीक करवाया था  इस सरोवर की परिधि 3.5 k.m  है सरोवर 2 भागो मैं बटा हुआ है सरोवर के बीच मैं मंदिर बना है सरोवर के बीच टापू मैं कृष्ण का रथ बनाया गया है जिसमे भगवन अर्जुन को गीता उपदेश दे रहे है 

1800 फीट लम्‍बा और 1400 फीट चौडा


सरोवर के बीच में भगवान शिव और मां काली का मंदिर भी है  --शिव मंदिर -जहां एक पुल के माध्‍यम से जाया जाता है



महाभारत के युद्ध में भीम द्वारा दुशासन को मारने उपरात द्रौपदी  ने अपने खुले केशों को यहीं आकर धोए थे यही कारण है कि यह स्थान वर्तमान में द्रौपदी कूप के नाम से जाना जाता










भद्रकाली शक्तिपीठ
51  शक्तिपीठो मैं से एक कुरुक्षेत्र मैं है माँ सती का दाया टखना यहाँ गिरा था  माना जाता है  कि कृष्ण तथा बलराम के मुंडन इसी जगह पे किये गए थे ये भी माना जाता है कि पांडवो ने युद्ध से पहले जीत के लिए यहाँ प्राथना की थी तथा जीत के बाद यहाँ घोड़े चढ़ाये थे आज भी यहाँ मिटटी के घोड़े चढ़ा कर मन्नत मांगी जाती है




शक्तिपीठ श्री देविकूप भद्रकाली मंदिर को “सावित्री पीठ”, “देवी पीठ”, “कालिका पीठ” या “आदी पीठ” भी कहा जाता है।



 सन्हित सरोवर
 इस सरोवर की मान्यता है कि अमावस्या के दिन पूरी दुनिया के तीर्थ इस जगह पे  एकत्रित होते है भागवत पुराण अनुसार श्री कृष्ण भगवान् ने इस सरोवर मैं सूर्य ग्रहण के दिन स्नान किया थासन्हितसरोवर  भगवान विष्णु का स्थायी निवास माना जाता है,





ज्योतिसर
ज्योति का अर्थ ‘प्रकाश‘ तथा ‘सर‘ का अर्थ ‘तालाब‘ व ‘सरोवर‘ अर्थात् ज्ञान रूपी प्रकाश का सरोवर।
ज्योतिसर  कुरुक्षेत्र-पहोवा मार्ग पर थानेसर से पाँच किमी पश्चिम में स्थित है। यहीं एक बरगद का वृक्ष है जिसके बारे में मान्यता है कि इसी वट वृक्ष के नीचे कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था और यहीं अर्जुन को अपना विराट रूप दिखाया था।
  1850   के मैं कश्मीर के राजा ने यहाँ शिव मंदिर बनवाया था यहाँ रोज रात लाइट एंड साउंड  शो होता है यहाँ 1967 मैं गुरु शंकर आचार्य ने रथ मैं उपदेश देते कृष्ण एवं अर्जुन की संगेमरमर की मूर्ति लगवाई थी जो अब  वहां से हटा दी गयी है





                                             
 श्री कृष्ण म्यूजियम
1987  मैं बनाया गया था- 1991  मैं नई बिल्डिंग मैं शिफ्ट किया गया 2012 मैं नई  गीता गैलरी ऐड की गयी  

नाभा हाउस
ये बिल्डिंग नाभा के महाराजा  ने  बनवायी थी जब रॉयल फॅमिली के लोग कुरुक्षेत्र आते  थे तो यहाँ ठहरते थे  ये 2 मंज़िला ईमारत 15 मीटर ऊँची है अपने खूबसूरत झरोको से , दरवाजो से , लोगो को अपनी और खींचती है






 पेहवा
यहाँ पे हिन्दू धरम को मानने वाले अपने पूर्वजो के पिंड दान करवाने आते है  






कुरुक्षेत्र साइंस सेंटर
म्यूजियम के साथ  बना ये म्यूजियम कुरुक्षेत्र की हिस्ट्री science की  हेल्प से दिखाता है






शेखचिल्ली का मकबरा

मुगलो के टाइम का ये मकबरा सूफी संत  अब्दुल करीम उर्फ़  शेखचिल्ली  की याद मैं दारा शिको सपुत्र शाह जहाँ ने बनवाया था इसके पीछे राजा हर्ष का क़िला नामक साइट पे 1st A.D  के राजपूत कला के निशान भी मिले है






स्थानेश्वर महादेव
शिव भगवन का ये मंदिर थानेसर नामक जगह पे स्तिथ है पुष्पभूति  जिसने वर्धन राज वंश की नीव रखी थी  उसने  इस मंदिर के नाम पे थानेसर नाम रखा था इस मंदिर को मराठा  सेना के मुखीआ सदाशिव राओ  ने राखी थी




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