Tuesday, 8 September 2026

अयोध्या-SRI RAM MANDIR

 


सरयू नदी के तट पर बसी, ऐतिहासिक नगरी , प्रभु श्री राम की जन्मस्थली ,मोक्षदायिनी अयोध्या, भारत के  सात पवित्र नगरों मे से एक है

 


आज चैनल आपको दर्शन करवाएगा अयोध्या के , साथ मे इस  वीडियो मे बतायेगे ,यहाँ के बेहतरीन होटल के बारे मे ,खाने के लिए कोण सी जगह बेहतर है इसके इलावा  मंदिर दर्शन के नियम ,तथा vip पास कैसे बनवाये जैसी बहुमूल्य जानकारियां

 


अयोध्या पहुँचना अपेक्षाकृत आसान है और परिवहन के कई विकल्प उपलब्ध.,लखनऊ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है, फैजाबाद व अयोध्या जिले के  रेलवे स्टेशन लगभग सभी प्रमुख महानगरों एवं नगरों से भलि-भांति जुड़े हैं उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की सेवा 24 घंटे उपलब्ध हैं


 अगर आप लखनऊ-गोरखपुर हाइवे के रास्ते अयोध्या में प्रवेश कर रहे हैं तो सरयू पुल से पहले आपको जो मार्ग मिलेगा, उसका नाम धर्मपथ है. इसी रास्ते से अयोध्या  entry hogi इसके बाद लगभग 2 किलोमीटर सफर करने पर लता मंगेशकर चौक मिलेगा, चौराहे का नाम भारत रत्न सम्मानित दिवंगत गायिका लता मंगेशकर चौक रखा गया है। यहाँ बीच में 40 फीट लंबी और 12 फीट ऊँची एक भव्य वीणा लगाई गई है।  


जिसे नया घाट भी कहते हैं इसके ठीक सामने राम की पैड़ी है राम की पैड़ी के किनारे ही अति प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिर नागेश्वर नाथ भी है   ——


SRI RAM MANDIR- राम भवन का उद्धघाटन 22 jan 2024 को हुआ था 27 एकड़ मे मंदिर नागर शैली मे बना है परिसर मे और भी मंदिर है इसमें यह मंदिर 360 फीट लंबा, 235 फीट चौड़ा और 161 फीट ऊंचा है, जिसमें तीन मंजिलें और 12 द्वार हैं,

 

KANAK BHAWAN= कनक भवन -पुराणिक कथाओं अनुसार यह वही भवन है जो  रानी कैकई ने  मुंह दिखाई मे सीता को दिया था यह राम तथा सीता की निजी निवास स्थान था वर्तमान भवन का निर्माण ओरछा की रानी वृष भानु ने 1891 मे करवाया था इसमें बुंदेली वास्तुकला आपको मंत्र मुग्ध कर देगी




kanak bhawan 


dashrath bhawan 



HANUMAAN GARI -इस मंदिर की स्‍थापना आज से 300 साल पहले स्‍वामी अभयारामदासी के निर्देश में अवध के नवाब  सिराजुद्दौला ने की थी। यह मंदिर अयोध्‍या शहर के बीचों बीच ऊंचे टीले पर स्थित है।  जहाँ तक पहुँचने के लिए आपको 76 सीढ़ियाँ चढ़कर जाना होगा। मंदिर में हनुमान जी की उनकी माँ के साथ भी मूर्ति है। मंदिर के पट सुबह 4 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुल जाते हैं, जो रात 10 बजे तक खुले रहते हैं।




सूर्य कुंड - अयोध्या कहते है राम के राज्याभिषेक के समय सूर्य देव यही रहे थे




 यहाँ शाम को दो  लेसर शो होता है 7 .30 तथा 8 .30 जिसकी टिकट है 




Sunday, 30 August 2026

मुक्तिनाथ मंदिर-Nepal

 


हिंदू
और बौद्ध  धर्म के अनुयाइयो के लिए मुक्तिनाथ मंदिर हिमालय के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है, मुक्तिनाथ धाम, जिसेमोक्ष का स्थानमाना जाता है, मुक्तिनाथ मंदिर हिंदू धर्म के 108 दिव्य देशमों में से एक है और इसे भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में पूजा जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर में पूजा करने से भक्तों को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है, इसलिए इसेमुक्तिनाथकहा जाता है,यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच होता है। आप सड़क से यां पोखरा से आप जोमसोम तक की हवाई यात्रा कर सकते हैं यात्रा की शुरुआत पोखरा की हरी-भरी घाटियों से होती है। आगे बढ़ने पर यह मार्ग मरुस्थलीय और पहाड़ी रेगिस्तान (Mustang region) में बदल जाता है।



मुक्तिनाथ नेपाल के मुस्तांग जिले में लगभग 3,710 से 3,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।यहाँ जाने के लिए आपको परमिट लेना पड़ता है जो आपको पोखरा से लेना पड़ता है फेवा लेक किनारे ऑफिस से आप परमिट ले सकते है इसके लिए आपको दो फोटो तथा वोटर कार्ड की जरूरत है आप पोखरा से टैक्सी ले कर जा सकते है आप परमिट के लिए ऑनलाइन भी apply कर सकते है -ड्राइवर एक्स्ट्रा पेमेंट  ले कर परमिट का प्रबंध कर देते है



सड़क मार्ग से दूरी 180  किमी के बीच है, सबसे पहले आता है  बेनी,फिर  तातोपानी और जोमसोम होते हुए मुक्तिनाथ पहुँचते है  पूरी यात्रा को तीन चरणों मे बाँट सकते है



पोखरा से बेनी (लगभग 100-110 किमी): यह पहला चरण यात्रा का सबसे आसान हिस्सा है, यहाँ तक  पक्की  सड़क  है।



बेनी से जोमसोम (लगभग 65-70 किमी): यहीं से यात्रा वास्तव में रोमांचक हो जाती है। यह सड़क काली गंडकी घाटी से होकर तातोपानी, घासा, कालोपानी और मारफा से गुजरती है और ज्यादातर कच्ची, ऊबड़-खाबड़ है, और मौसम के अनुसार भूस्खलन या कीचड़ भरे रास्तों का खतरा बना रहता है।


जोमसोम से मुक्तिनाथ (लगभग 19-21 किमी)

 घासा: पोखरा/बेनी से लोअर मुस्तांग क्षेत्र में सड़क मार्ग से गाड़ी या सवारी करके आने वाले यात्रियों के लिए पहला एंट्री चेक पोस्ट। घासा से जोमसोम तक सड़क मार्ग से लगभग 34 किलोमीटर की दूरी तय होती है। आप घासा (6,594 फीट) से जोमसोम (8,860 फीट) तक चढ़ते हैं।



 जोमसोम नेपाल में अन्नपूर्णा सर्किट ट्रेक पर एक ट्रेकिंग पर्वतीय शहर है। लोग यहीं से ट्रैकिंग शुरू करते हैं। आप यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा शालिग्राम देख सकते हैं


श्री विष्णु शालिग्राम शिला के रूप में हैं। दुनिया को बुरी ताकतों से बचाने की प्रक्रिया में, श्री विष्णु ने चाहते हुए भी अपनी प्रिय भक्त तुलसी को धोखा दिया। इसके परिणामस्वरूप, उन्हें शालिग्राम शिला के रूप में जीवन बिताने का श्राप मिला।

लेकिन वर्तमान मंदिर, पैगोडा शैली में निर्मित, 1815 ईस्वी के आसपास राजा राणा बहादुर शाह की पत्नी और राजा पृथ्वी नारायण शाह की बहू रानी सुवर्ण प्रभा देवी द्वारा बनाया गया था।

गंडकी नदी का पानी 108 गाय के सिर वाली पानी की टोंटियों से होकर बहता है, जिन्हें 108 मुक्ति धारा के नाम से जाना जाता है। हिंदुओं का मानना ​​है कि इन 108 मुक्ति धाराओं में नहाने से पिछले पाप और बुरे कर्म धुल जाते हैं।


गुरु रिनपोछे और स्वामीनारायण संप्रदाय के अनुयायियों के लिए, मुक्तिनाथ को बहुत शक्तिशाली मानते हैं









अयोध्या-SRI RAM MANDIR

  सरयू नदी के तट पर बसी , ऐतिहासिक नगरी , प्रभु श्री राम की जन्मस्थली , मोक्षदायिनी अयोध्या , भारत के   सात पवित्र नगरों मे...