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Tuesday, 7 July 2026

NEPAL -PASHUPATINATH -DURBAR SQUARE -PATAN DURBAR

 


नेपाल की "गंगा",यानि  बागमती नदी नेपाल की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदियों में से एक है - जिसके के किनारे , बने घाटौं पर राजा से लेकर रंक तक सभी का अन्तिम संस्कार किया जाता है



 'मृत्यु' का अर्थ केवल शरीर का छूटना नहीं, बल्कि सांसारिक माया का अंत होना है  जो मोक्ष का मार्ग है आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह मंदिर जीवन, मृत्यु और परम मोक्ष का संगम माना जाता है



राख जीवन का परम सत्य है शरीर की राख ही वह सच्चाई है जो मृत्यु के बाद शेष बचती है। साधुओं, अघोरियों और योगियों की तपोभूमि जिसके  के वातावरण में तांत्रिक साधनाओं और वैदिक अनुष्ठानों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है यहाँ  500 से ज्यादा मंदिर ,लाशों से उठते धुंए और आरती की थाली  से कपूर की महक एक अद्भुत अध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करती है।



आज हम आपको ले कर चलेंगे दुनिया के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण हिंदू मंदिरों में से एक पशुपतिनाथ जी के मंदिर  , जो  नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के तट पर स्तिथ है मंदिर परिसर 264-hectare में फैला है



गर्भगृह सुबह 4 am to 12 noon शाम को  5 pm to 9 pm तक खुलता है नेपाल देश भले ही छोटा हो, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह खासा महत्वपूर्ण है।



यहाँ 500 से ज़्यादा मंदिर हैं जो लकड़ी की छतों से सुसज्जित है हिंदुओं के अंतिम संस्कार के लिए खुले में बने घाट भी हैं। मंदिर मैं प्रवेश ,सिर्फ़ हिंदू धर्म के मानने वालों के लिए है।   जो लोग हिंदू नहीं हैं, वे बागमती नदी के दूसरी ओर बनी छतों से इसकी शानदार बनावट और पूरे परिसर को देख सकते हैं।



मुख्य मंदिर भगवान शिव के पांच मुखी स्वरूप को समर्पित है। यह मंदिर नेपाल में शिव का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है।पशुपति'का अर्थ  है सभी जीव-जंतुओं के रक्षक



पहला लिखित इतिहास लगभग 400 ईसा पूर्व (लगभग 1600 वर्ष पुराना) का मिलता है। छठी-सातवीं सदी में लिच्छवी राजाओं ने इसे एक व्यवस्थित संरचना प्रदान की  । पुरानी कथाओं के अनुसार भगवान शिव यहाँ पशुपति (सभी जीव-जंतुओं के रक्षक) के रूप में विराजमान हैं।  15 वीं शताब्दी के राजा प्रताप मल्ल से शुरु हुई परंपरा है कि मंदिर में चार मेंपुजारी (भट्ट) और एक मुख्य पुजारी (मूल-भट्ट) दक्षिण भारत के ब्राह्मणों में से रखे जाते हैं।



यूनिस्को ने इसे सन 1979 मैं शामिल किया था  मूल मंदिर कई बार नष्ट हुआ। इसे वर्तमान स्वरूप नरेश भूपतेंद्र मल्ल ने 1697 में प्रदान किया।आज का मुख्य मंदिर लकड़ी की बारीक नक्काशी वाले पारंपरिक नेपाली पगोडा शैली में बना है। यह नेवारी पगोडा शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसकी छतें तांबे और सोने से बनी हैं। इसमें चांदी के दरवाजे और पत्थर का चौकोर आधार है




मंदिर के ठीक सामने आर्य घाट है, जहाँ प्राचीन काल से अंतिम संस्कार होते आ रहे हैं। इसे मोक्ष का केंद्र माना जाता है। पशुपतिनाथ मंदिर में बलि  दी जाती है



इससे कई पौराणिक कहानियां भी जुड़ी हुई हैं। इनमें से एक कहानी इस तरह है- कुरुक्षेत्र की लड़ाई के बाद अपने ही बंधुओं की हत्या करने की वजह से पांडव बेहद दुखी थे।लेकिन शिव नहीं चाहते थे कि जो जघन्य कांड उन्होंने किया है, उससे उनको इतनी आसानी से मुक्ति दे दी जाए। इसलिए पांडवों को अपने पास देखकर उन्होंने एक बैल का रूप धारण कर लिया और वहां से भागने की कोशिश करने लगे।शिव जमीन में लुप्त हो गए और जब वह पुन: अवतरित हुए, नेपाल के पशुपतिनाथ में उनका मस्तक गिरा था और तभी इस मंदिर को तमाम मंदिरों में सबसे खास माना जाता है। केदारनाथ में बैल का कूबड़ गिरा था। बैल के आगे की दो टांगें तुंगनाथ में गिरीं। यह जगह केदार के रास्ते में पड़ता है। बैल का नाभि वाला हिस्सा हिमालय के भारतीय इलाके  में गिरा




NOTE 

मुख्य दरवाज़े से आगे और गर्भगृह में जाने की इजाज़त सिर्फ़ हिंदू धर्म के मानने वालों को ही  है।

नेपाली और भारतीय नागरिकों को आम तौर पर मुफ़्त एंट्री मिलती है।

दूसरे देशों से आने वाले लोगों को एंट्री फ़ीस देनी पड़ती है।

पुरुषों और महिलाओंकंधे और घुटने पूरी तरह ढके होने चाहिए। छोटे शॉर्ट्सक्रॉप टॉप या टाइट/शरीर दिखाने वाले कपड़े पहनें।

चमड़े की चीज़ें ले जाना सख़्त मना है।

 ज़मीन पर रखी पूजा की चीज़ों, फूलों या तेल के दीयों के ऊपर से गुज़रें।

सार्वजनिक रूप से प्यार का इज़हार करना मना है।




एंट्रीतो 12 ,5 TO 9 AARTI 6  तो 7

Panchamrit Puja               2,100    

Panchamrit with Balbhog              3,100    

Panchamrit Puja with Rudrabhishek and Balbhog               7,500    

Panchamrit Puja with Laghurudrabhishek & Purabhog     15,100  

Panchamrit Puja with Rudrabhishek, Purabhog & 125,000 Deep Arati       35,000  

Dugdharpan       1,100    

Registration fee Rs. 200 If family members are not available to perform the last rites, the Ghat Service Center takes full responsibility for the process — arranging a priest, guiding families through ceremonies,

Electric Cremation House






दरबार स्क्वायर को हनुमान डोका भी कहा जाता है




 यहाँ पर entry के लिए आपको टिकट लेना पड़ता है जो सार्क देशो के लिए कम है बाकि देशों  के लिए ज्यादा है  



दरबार स्क्वायर - 12th से 18th century बनायीं सरचनाओ की एक पूरी श्रंखला है   इस पुरे complex मे   यहाँ 50 मंदिर और 2 courtyard है




यह है स्वेत भैरव -12-foot mask- जिसके स्वरुप को लकड़ी की नक्काशीदार जाली से ढक दिया गया है जिसे साल मे एक बार ही खोला जाता



यहाँ  NASAL CHOWK,हे   यहाँ KUMARI TEMPLE,TRIBHUWAN MUSEUM है  





5th century की निर्मित यह मूर्ति  17th century  मे King Pratap Malla   द्वारा काठमांडू के दरबार स्क्वायर मे स्थापित

करवाई गयी थी लोग फूल नारियल  चढ़ा ,घी के दीपक जला कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते है यहाँ पर उनके भोग लिए

विशेष तोर पर हंस के अंडे अर्पित किये जाते है 



काले पत्थर से निर्मित, 5  मीटर ऊँची काल भैरव की  विशाल मूर्ति पुरे  विश्व मे नेपाल की विशिष्ट पहचान बन चुकी है काल  भैरव भगवान शिव के रौद्र रूप को represent करते है जिन्हे तंत्र का देवता माना जाता है



पुराने समय मे न्याय करने के लिए इसका उपयोग किया जाता था मान्यता अनुसार जो व्यक्ति काल भैरव से सामने झूठ बोलते थे उन्हें काल भैरव  supernatural justice देते थे



अकेले काठमांडू घाटी में UNESCO की 7 विश्व धरोहर स्थल हैं। 




PALACE 


MUSEUM 


PATAN DUBAR 
 शहर के बीचों-बीच स्थित पाटन दरबार स्क्वायर। पाटन, जिसे ललितपुर यानी "कला का शहर" भी कहा जाता है,पाटन को 2018 में "विश्व शिल्प शहर" (World Craft City) का दर्जा दिया गया था



पाटन दरबार स्क्वायर कॉम्प्लेक्स में महल, मंदिर, मठ, घर और धर्मशालाएं शामिल हैं, जो मल्ल काल की असाधारण रूप से आकर्षक कला हैं। एक इमारत का हर अलग-अलग हिस्सा, जैसे खिड़कियां, दरवाजे, दीवारें, खंभे और बीम, हर स्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर और डिटेल में उकेरा गया है।



पाटन म्यूज़ियम-1997 AD से, पुराने ज़माने के पाटन शाही महल को पाटन म्यूज़ियम में बदल दिया गया

 है। पाटन म्यूज़ियम तीनों मंज़िलों का संग्रहालय है;



मंदिर व्यापार और वाणिज्य के देवता भीमसेन को समर्पित है,
भीमसेन मंदिर की कई खासियतें अनोखी हैं। पहली बात, चौक में यह एकमात्र ऐसी इमारत है जिसे लंबी पताका-पट्टियों से सजाया गया है। पारंपरिक रूप से माना जाता है कि ये पट्टियाँ एक दिव्य सीढ़ी का प्रतीक हैं, जिसके ज़रिए देवता अपने स्वर्गीय निवास से धरती पर आ-जा सकते हैं। दूसरी बात, पूर्व की ओर बनी बालकनी पूरी तरह से चमकदार सुनहरी परत से ढकी हुई है; इसमें लकड़ी के वे ब्रैकेट भी शामिल हैं जिन पर शिव, पार्वती, भैरव और गणेश की आकृतियाँ बनी हैं। आखिर में, छत के हर हिस्से (टियर) पर धातु के कलश लगे हैं;



दिनभर बड़ी संख्या में बौद्ध और हिंदू स्वयंभू मंदिर दर्शन के लिए आते हैं।
यह मंदिर शायद नेपाल में धार्मिक सद्भाव देखने का सबसे अच्छा स्थान है।




इन इमारतों में खास तरह की ईंट, लकड़ी, छत की टाइलें और मिट्टी का इस्तेमाल किया गया था।

पाटन दरबार स्क्वायर में जगन्नाथ (कृष्ण) मंदिर-, तीन मंज़िला है, जिसमें कामुक नक्काशी है।



गुहेश्वरी shaktipeeth -boudhnath stupa -nepal -kathmandu

SHAKTIPEETH KATHMANDU  यहां गिरा था माता सती का घुटना इस मंदिर को गुहेश्वरी और गुजेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है। अष्टमी...