Showing posts with label rajasthan tourism. Show all posts
Showing posts with label rajasthan tourism. Show all posts

Saturday, 25 May 2024

जीण माताजी मंदिर सीकर

 


जीण
माताजी मंदिर सीकर शहर से 29 किमी की दूरी पर  पहाड़ी के पास स्थित है। यह घने जंगल से घिरा हुआ है। ।लोक मान्यताओं के अनुसार जीवण का जन्म चौहान वंश के राजपूत परिवार में हुआ। उनके भाई का नाम हर्ष था। 

एक बार जीवण का अपनी भाभी के साथ विवाद हो गया और इसी विवाद के चलते जीवण और हर्ष में नाराजगी हो गयी।इसके बाद जीवण आरावली के 'काजल शिखर' पर पहुँच कर तपस्या करने लगीं।मान्यताओं के अनुसार इसी प्रभाव से वो बाद में देवी रूप में परिवर्तित हुई


 
जीवण ने यहाँ जयंती माताजी की तपस्या की और जीण माताजी के नाम से पूजी जाने लगी। इस मंदिर के करीब ही उसके भाई हर्ष भैरवनाथ मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। जीण माताजी मंदिर के पट कभी बंद नहीं होते हैं। ग्रहण में भी माई की आरती सही समय पर होती हैं।


एक
लोकप्रिय मान्यता है जो सदियों से लोगों तक आती है कि चुरु के एक गांव घांघू में राजा गंगो सींघ जी ने इस शर्त पर ऊर्वशी (अप्सरा) से शादी कर ली, कि वह अपने महल में पूर्व सूचना के बिना नहीं जाएंगे। राजा गंगोसींघजी को एक पुत्र मिला जिसे हर्ष कहा जाता था और एक बेटी जीवण थी। लेकिन राजा गंगोसींघजी बिना बताए महल में गये अप्सरा से किए गए प्रतिज्ञा का उल्लंघन किया। तुरन्त उसने राजा को छोड़ दिया और अपने बेटे हर्ष और बेटी जीवण को भगा लिया, जिसे वह उस जगह पर छोड़ दिया जहां वर्तमान में मंदिर खड़ा है। यहां दो बच्चों ने अत्यधिक तपस्या का अभ्यास किया बाद में एक चौहान शासक ने उस जगह पर मंदिर बनाया।


 इस मंदिर में अनगिनत चमत्कार देखें महसूस किए जाते हैं। रोज सुबह माई को मदिरा का भोग लगाया जाता है और बडे चाव से मैया उसको स्वीकार करती है। मदिरा भोग लगाते ही गायब हो जाता है और आज तक किसी को पता नहीं चला कि मदिरा जाता कहा है


 
इसके अलावा मीठे चावल का भोग भी माई को लगाया जाता है। मंदिर के परिसर में पहले बाल काट (राजस्थानी में जडूला के रूप में जाना जाता है) की पेशकश की जाती है। अनुयायियों ने मंदिर में 50 किलो मिठाइयां, जो कि सवामणी के नाम से जानी जाती हैं, की पेशकश करती हैं।


मूगल सम्राट औरंगजेब माता के मंदिर के मैदान पर उतरना चाहता था। उसके पुजारियों द्वारा बुलाया जाने वाला, माता ने भैरों की अपनी सेना को छोड़ दिया (एक मक्खी परिवार की प्रजाति) जिसने सम्राट और उसके सैनिकों को अपने घुटनों पर लाया।



उसने माफी मांगी और दयालु मातजी ने उसे अपने गुस्से से माफ़ किया। औरंगजेब ने अपने दिल्ली महल से अखण्ड (कभी-चमक) तेल का दीपक दान किया। माता के पवित्र संस्कार में यह दीपक अभी भी चमक रहा है।





Saturday, 11 May 2024

झुंझुनू -रानी सती मंदिर -खेमी सती मंदिर -

 


रंग बिरंगे खूबसूरत रोशनियों से नहाया हुआ, उत्तरी भारत के सबसे अमीर मंदिरो मे से एक , स्त्री शक्ति का प्रतीक ,मंदिर है रानी सती का मंदिर




 झुंझुनू के रानी सती के मंदिर -जो एक राजस्थानी महिला रानी सती को समर्पित है,





झुंझुनू एक पुराना और ऐतिहासिक शहर है यह जयपुर से 180 किमी और दिल्ली से 245 किमी दूर स्थित है।

ऐसा कहा जाता है कि इस शहर का नाम झुंझा या जुझार सिंह नेहरा नामक जाट नेता की याद में रखा गया था। हम ठीक से नहीं जानते कि ऐसा कब हुआ। लेकिन इस नाम का उल्लेख 15वीं शताब्दी के कई दिगंबर ग्रंथों में पाया गया है।




श्री राणी सतीजी मंदिर  91- 1592 232755,

रानी सती का वास्तविक नाम नारायणी बताया जाता है। जो 13 वीं और 17 वीं शताब्दी के बीच में रहती थी  कहानियों के अनुसार एक युद्ध के दौरान नारायणी देवी/रानी सती के पति की मौत हो जाती है जिसके बाद वो भी सती हो गई थी। अब यह मंदिर सटी प्रथा का विरोध करता है मंदिर परिसर मे बड़े अक्षरों मे यह लिखा गया है


 

मंदिर सुबह पांच से दोपहर एक बजे तक शाम तीन बजे से रात दस बजे तक खुलता  है मंदिर मे रहने लिए हज़ारो कमरे है जो 100 रुपए से 800 रुपए तक के है ac non ac दोनों प्रकार के रूम है हमें जो खास लगी हमारे ac कमरे मे रूम हीटर water cooler यहाँ तक की स्लीपर भी available थी  दोपहर तथा रात  का भोजन केवल 50 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से मंदिर मे उपलब्ध है



यह मंदिर सदियों पुराना है। मंदिर में नारायणी देवी को, शक्ति का प्रतिनिधित्व करने वाला त्रिशूल के प्रतीक के रूप मे पूजा जाता है





इस मंदिर परिसर में 16 देवियों की मूर्तियां ,शिव, हनुमान, सीता, भगवान गणेश
 मंदिर भी हैं। मंदिर में प्रसाद की सुविधा के अलावा, दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक कैंटीन भी है।




2.       Shree Khemi Sati Temple- JHUNJHUNU - यह मंदिर हिंदू देवी खेमी सती को समर्पित है, ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर राठौड़ वंश के शासकों द्वारा बनाया गया था, इसमें 50 से अधिक कमरे हैं, एसी और नॉन-एसी दोनों




















3.       Panchdev Mandir - Baba Gangaram Dham राजस्थान के झुंझूनूं शहर के पंचदेव मंदिर परिसर में प्राचीन शिल्पकला की नागर शैली में 24 नक्काशीदार खंभों पर मंदिर का निर्माण किया गया है. जिसमें दिशा व नक्षत्रों के अनुसार गणना कर मंदिर की लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई का माप वास्तुशिल्प के आधार पर निर्धारित की गई है.

खंभों को ओडीशा के कारीगरों ने तराशा है.  16 फीट ठोस काले पत्थर की नींव पर बने इस मंदिर की लंबाई 72 फीट, चौड़ाई 46 फीट व ऊंचाई 65 फीट है. करीब 3000 टन संगमरमर लगा है. सीमेंट, चूना, लोहा व स्टील का प्रयोग नहीं किया गया है.


मंदिर में मुख्य शिखर सहित पांच गुंबद है.

झुंझुनूं में गंगादशहरा के पावन दिन 1975 में उन्होंने पंचदेव मंदिर की स्थापना की. मंदिर में बाबा गंगाराम सहित श्री शिव परिवार, पवनपुत्र हनुमान, मां दुर्गा एवं मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित हैं.


दरगाह हज़रत कमरुद्दीन शाह

एक मुस्लिम संत - कमरुद्दीन शाह की कब्र है। उनका जन्म 1784 में हुआ था।


 यह एक परिसर है जिसमें 'मदरसा', एक मस्जिद और एक 'महफिलखाना' शामिल हैं। यह संरचना 1841 में मेजर फोर्स्टर के नवजात बेटे के निधन पर बनाई गई थी।


 संत कमरुद्दीन शाह की दरगाह हिंदू मुस्लिम सद्भाव में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। दोनों समुदायों के बीच इस सौहार्द का एक अजीब चित्रण प्रवेश द्वार पर 'स्वस्तिक' चिन्ह के रूप में देखा जा सकता है।






MANSA DEVI 









गुह्येश्वरी शक्तिपीठ -बूढ़ा नीलकंठ मंदिर -- Chandra giri Hills --Garden of dreams

नेपाल का बूढ़ा नीलकंठ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित   है,शेषनाग पर शयन मुद्रा में भगवान की 5 मीटर लंबी विशाल मूर्ति पानी में तैरती हुई प्रती...