Friday, 21 March 2025

सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम,--सुजानपुर तिहरा हिमाचल


 सुजानपुर तिहरा हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले का एक शहर है। 18वीं शताब्दी में कटोच राजवंश द्वारा स्थापित है।हमीरपुर पालमपुर रोड पर हमीरपुर से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है अंब रेलवे स्टेशन सुजानपुर शहर से लगभग 94 किलोमीटर दूर है | पालमपुर से सुजानपुर 43 किलोमीटर है। यहां से गगल स्थित कांगड़ा हवाईअड्डा की दूरी 64 किलोमीटर है।



. व्यास नदी के बाएँ किनारे पर स्थित सुजानपुर टिहरा एक एतिहासिक एवं दर्शनीय शहर है     हमीरपुर चौगान (मैदान) के लिए प्रसिद्ध है जो राज्य का सबसे बड़ा चौगान है  सुजानपुर टीरा फोर्ट , नर्वदेश्वर महादेव मंदिर,मुरली मनोहर मंदिर भ्रमण स्थल  है 


 सुजानपुर फोर्ट के आसपास मौजूद अद्भुत नजारे किसी भी पर्यटक को दीवाना बना सकते हैं।   सुजानपुर टीरा फोर्ट को लेकर यह दावा किया जाता है कि यह फोर्ट रहस्यमयी कहानियों के साथ-साथ खजाना से भरा हुआ है।स्थानीय लोगों का मानना है कि इस फोर्ट पर किसी न किसी रूहानी ताकतों की साया है 


कहा जाता है कि सूरज ढलते ही इस फोर्ट के आसपास से अजीब-अजीब आवाजे आने लगती है।इस किले को कटोच वंश के राजा अभय चंद ने 260 साल पहले यानी साल 1758 में बनवाया था।


उसके बाद यहां राजा संसार चंद ने राज किया।  1793 ई. में राजा संसार चंद के समय निर्मित  गौरी-शंकर मंदिर सुजानपुर किले में स्थित है और किले के ऊपरी भाग में कटोच वंश की कुलदेवी का मंदिर भी स्थित है.



बता दें कि महल में 12 दरवाजे थे जिस कारण इसे बारादरी के नाम से भी जाना जाता था.



इतिहासकार बताते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत में राजा संसार चंद ने सुजानपुर को अपनी राजधानी बनाया था और इस किले में अपने परिवार के साथ रहे थे.

किले के अंदर ही एक पांच किलोमीटर लंबी सुरंग है, रास्ता तंग और अंधेरा होने के कारण इस सुरंग में 100 मीटर से ज्यादा अंदर जाने की कोई सोचता भी नहीं।इस सुरंग को भी कोई आजतक खोज नहीं पाया है। कई लोगों ने ये भी कहा कि राजा संसार चंद लुटे हुए खजाने को सुरंग में रखा करते थे।





दार्जिलिंग

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