Saturday, 1 August 2026

गुह्येश्वरी शक्तिपीठ -बूढ़ा नीलकंठ मंदिर -- Chandra giri Hills --Garden of dreams


नेपाल का बूढ़ा नीलकंठ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित  है,शेषनाग पर शयन मुद्रा में भगवान की 5 मीटर लंबी विशाल मूर्ति पानी में तैरती हुई प्रतीत होती है।जिसे एक ही चट्टान से तराशा गया है।भगवान विष्णु की मूर्ति नेपाल की सबसे बड़ी पत्थर की नक्काशी मानी जाती है,



swal yeh hai ki बूढ़ा नीलकंठ महादेव तो कहीं नहीं है.
ऐसी मान्यता है कि विषपान करने के पश्चात जब भगवान शिव का कंठ जलने लगा तब उन्होने विष के प्रभाव शांत करने के लिए जल की आवश्यकता की पूर्ति के लिए एक स्थान पर आकर त्रिशूल का प्रहार किया जिससे गोंसाईकुंड झील का निर्माण हुआ
मान्यता है कि बूढा नीलकंठ में उसी गोसाईन कुंड का जल आता है, जिसका निर्माण भगवान शिव ने किया था. इसलिए इसका नाम बूढ़ा नीलकंठ पड़ा.






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Garden of dreams 








नेपाल का गुह्येश्वरी शक्तिपीठ



नेपाल का गुह्येश्वरी शक्तिपीठअपने तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए भी जाना जाता है।



माता की महामाया और शिव के कपाली रूप की पूजा



पशुपतिनाथ से पहले मां के दर्शन की परंपरा



यहां सती के दोनों घुटने गिरे थे
खास बात है कि इस मंदिर में मां की कोई प्रतिमा नहीं है।यहाँ एक सोने या चांदी के कलश से ढका हुआ कुंड है,  



नवरात्र पर यहां पांच पशुओं की बली के साथ विशेष काल रात्रि पूजा होती है।


 मंदिर की वास्तुकला पैगोडा शैली में है। राजा प्रपात मल्ल द्वारा 1654 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।


 

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