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Tuesday, 7 May 2024

सालासर बालाजी -दाढ़ी मूछ वाले हनुमान जी का मंदिर

 


क्या आपने ऐसे किसी मंदिर के बारे सुना है जहाँ पर हनुमान  जी की दाढ़ी व मूंछे है

एक मंदिर जिसकी कुछ रोचक बातें आपको हैरान कर देंगी

भारत के एक मात्र दाढ़ी मूछ वाले हनुमान जी का मंदिर  ,जहाँ भगत हनुमान जी को नारियल चढ़ा कर मन्नत मानते है



यहाँ  पर हनुमान  जी को बाला जी के  नाम से पूजा जाता है 

बाला जी के प्रकट होने की कथा जितनी ही चमत्कारी है उतने ही बाला जी भी चमत्कारी और भक्तों की मनोकामना पूरी करने वाले हैं

बालाजी के बारे में एक बड़ी रोचक बात यह है क‌ि इनके मंद‌िर का न‌िर्माण करने वाले मुसलमान कारीगर थे। इनमें नूर मोहम्मद और दाऊ का नाम शाम‌िल है।

300 वर्ष से यहाँ अखण्ड धुना जल रहा है

यह मंदिर सालासर  बालाजी के नाम से विख्यात है


सालासर कस्बा, राजस्थान में चूरू जिले का एक हिस्सा है यह सीकर से 57 किलोमीटर, सुजानगढ़ से 24 किलोमीटर और लक्ष्मणगढ़ से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नजदीकी हवाईअड्डा जयपुर से  सालासर पहुँचने में 3.5 घंटे का समय लगता है।


नागौर जिले में असोटा गाँव का एक किसान अपने खेत को जोत रहा था।अचानक उसे मिट्टी में सनी बालाजी भगवान श्री हनुमान की मूर्त्ति थी। बालाजी ने असोटा के ठाकुर को सपने में आकर आदेश दिया कि इस मूर्त्ति को सालासर भेज दिया जाए। मूर्त्ति को सालासर भेज दिया गया   मोहनदास जी ने निर्देशित किया कि “बैल जहाँ पर भी रूकेंगे, वहीं पर मूर्ति की स्थापना होगी| बैल रेत के टीले पर जाकर रूक गये  सन् 1755 शनिवार के दिन श्री बालाजी महाराज की मूर्ति की स्थापना की गई। 




 प्रारंभ में, मंदिर, एक मिट्टी-पत्थर की संरचना थी।
   later  पूरी गर्भगृह को सोने और चांदी के कार्यों से सजाया गया । यहां तक कि बर्तन भी चांदी से बने हैं। बालाजी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार संगमरमर से बनाया गया



यहाँ की मान्यता है की मात्र नारियल बांधने से बालाजी महाराज सभी इच्छाओं को पूरी करते है।बालाजी की प्रतिमा शालिग्राम पत्थर की है जिसे सिंदूरी रंग और सोने से सजाया गया है।

 

प्रतिष्ठा के समय से ही मन्दिर के अन्दर दीप प्रज्वलित है।


मोहनदास जी का अखण्ड धूंणा है, श्री मोहनदास जी और मोहनदास जी की बहन दादी की समाधी  बालाजी मंदिर के पास स्थित है




अंजनी माता का मंदिर 






Tuesday, 30 April 2024

श्री खाटू श्याम जी

 निशान यात्रा में झूमते  भक्-भगवान खाटू श्याम की जयकार करते हुए तंग गलियों से गुजरते हुए आनंद मे खो जाते है  और  दर्शन की अभिलाषा मे  मस्ती से मुख्य मंदिर की तरफ़ बढ़ते जाते है




खाटू श्याम जी का nearest रेलवे स्टेशन रींगस है  दिल्ली से Sainik Express,

Daurai Special ,Ajmer Jan Shatabdi Express, ट्रैन है जो  5 hours लेती है

 बेस्ट ट्रैन है  Chetak Express  जो  8 बजे चलती है रात 11. 30 बजे पंहुचा देती है



पंजाब से अंबाला के पास से नेशनल हाईवे 52 fastest route हैं  अम्बाला से जाते है तो पहले आप झुनझुनु -बसाऊ ,मंडावा चूरू ,नवलगढ़ ,सालसर बालाजी  दर्शन कर भी खाटू श्याम पहुँच सकते है यहाँ 35 के आसपास धर्मशाला है जहाँ आप फ़ोन पर भी बुकिंग करवा सकते है 300 रुपए से  2000 तक आप सिंगल bed से लेकर 4 बेड रूम तक ले सकते  है









old shyamkund 



New shayam kund 

यह मंदिर 1027 ई॰ में रूपसिंह चौहान और नर्मदा कँवर द्वारा बनाया गया। इस मंदिर में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक के सिर की पूजा होती है। जबकि बर्बरीक के शरीर की पूजा हरियाणा के हिसार जिले के एक छोटे से गांव स्याहड़वा में होती है।

हिन्दू धर्म के अनुसार, खाटू श्याम जी ने द्वापरयुग में श्री कृष्ण से वरदान प्राप्त किया था कि वे कलयुग में उनके नाम श्याम से पूजे जाएँगे। बर्बरीक जी का शीश खाटू नगर (वर्तमान राजस्थान राज्य के सीकर जिला) में दफ़नाया गया इसलिए उन्हें खाटू श्याम बाबा कहा जाता है।

कार्तिक माह की एकादशी को शीश मन्दिर में सुशोभित किया गया, जिसे बाबा श्याम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।


मारवाड़ के शासक ठाकुर के दीवान अभय सिंह ने ठाकुर के निर्देश पर 1720 . में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।

Tourist Places to Visit in Khatu Shyam Ji

 Shri  Shyam Mandir     Shyam Bagichi      Gaurishankar Mandir      Shri Hanuman Mandir



Sunday, 31 March 2024

एशिया की दूसरी सबसे बड़ी नीलकंठ महादेव की प्रतिमा

 

एशिया की दूसरी सबसे बड़ी नीलकंठ महादेव की प्रतिमा

आज हम आपको दर्शन करवाएंगे भगवान भोलेनाथ की एक मूर्ति के जिसके बारे मे दावा किया जाता है कि यह एशिया की बड़ी मूर्तियों मे दूसरे स्थान पर है  

प्रथम स्थान पर है  नेपाल में स्तिथ  कैलाशनाथ महादेव  की सबसे ऊंची प्रतिमा -इस प्रतिमा की ऊंचाई 144 फीट है.


  जिस मूर्ति की हम बात कर रहे है  -यह राजस्थान के एक गांव  बसाऊ मे स्थपित की गई है बसाऊ चूरू से झुनझनू मार्ग पर चूरू से 12  किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है


बिसाऊ में नीलकंठ महादेव की 132 फीट ऊंची प्रतिमा लोगों के श्रद्धा का केन्द्र बनी हुई है  


मंदिर परिसर में ही भगवान भोलेनाथ के 12 ज्योर्तिलिंग भी स्थापित किए गए हैं. इसके अलावा नवग्रह भी स्थापित किए गए हैं. प्रतिमा का निर्माण महावीर प्रसाद जटिया ने वर्ष 2011 में करवाया था. इसके निर्माण में करीब ढाई साल का समय लगा.


मान्यता है कि प्रतिमा के आगे मोली बांधने से भगवान भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं.







अयोध्या-SRI RAM MANDIR

  सरयू नदी के तट पर बसी , ऐतिहासिक नगरी , प्रभु श्री राम की जन्मस्थली , मोक्षदायिनी अयोध्या , भारत के   सात पवित्र नगरों मे...