Tuesday, 7 July 2026

नेपाल - भक्तपुर -NEPAL -BHAKATPUR - 1100 YEARS OLD TEMPLES

 


नेपाल के भक्तपुर के यह  प्राचीन मंदिर महज पूजा स्थल नहीं हैं, बल्कि ये  समृद्ध नेपाली  मंदिर दर्शन और तंत्र के रीती रिवाजो का मिश्रण है  और इतिहास के जीवित दस्तावेज हैं।



भारत के हिंदू धार्मिक परंपराओं से निकली 'तंत्र' की धारातय रीति-रिवाजों व प्रार्थनाओं के ज़रिए मोक्ष पाने का एक मार्ग हैयह प्राथनाएं नेपाल में प्राचीन काल से ही गहराई से रची-बसी है।



तलेजू देवी का मंदिर जो  वर्ष मे एक बार ही पशु बलि के साथ  खुलता है ,गोल्डन गेट पर 10  हाथो वाली माँ काली और गरुड़ की carving , पास ही उग्रचंडी ,उग्र भैरव शिव के तांत्रिक रूपों को प्रदर्शित ही नहीं करती यह सन्देश भी देती है कि इन ऐतिहासिक और भव्य मंदिरों के दर्शन करना और उनके वास्तुशिल्प को करीब से देखना इतिहास के पन्नों में एक अलौकिक सफर तय करने जैसा है।



जब हम भक्तपुर में जाते हैं, तब हम वक्त के 1100 साल पुराने दौर में होते हैं। भक्तपुर को स्थानीय नेवारी भाषा में 'ख्वोपा' कहा जाता है। ऐतिहासिक रूप से इसे 'भादगाँव' (Bhadgaon) नाम से भी जाना जाता है।



 -धर्म एवं संस्कृति, के संगम की अनोखी मिसाल है -यहाँ का दरबार स्क्वायर- 

'दरबार' शब्द का अर्थ है महल - स्क्वायर- सार्वजनिक चौकों को कहा जाता है



 शिल्पकारों का सौंदर्यबोध, राजाओं का कला प्रेम, दोनों के संगम ने इस शहर को इस प्रकार से सजाया है कि आप अपने आप को किसी कल्पना लोग मैं पाते है,



दरबार स्क्वायर - दिव्या, अलौकिक वैभव शाली इमारतों की एक श्रंखला है आकाश को चिढ़ाते हुए मंदिर, राजशी ठाठबाठ को बखान करते मंदिर, जिनकी धातुकला, कास्तकाला, मूर्ति कला, सब विस्मित करने वाला है



ज़रा सोचिये - तब वक्त कैसा होता होगा- जब महिलाएं सिर्फ लाल रंग के वस्त्रों में होतीं थीं और पुरुष सफेद रंग पहना करते थे। लोग ईंटों की जिन इमारतों में रहते थे, वो आज भी खड़ी हैं। यहां कई लोग आज भी उन्हीं घरों में रहते हैं, जहां 1100 साल पहले उनके पूर्वज रहते थे। यहां आने पर आपको अहसास होगा कि हजारों साल पहले के लोगों में कैसा जबर्दस्त सौंदर्य-बोध था



शिखर शैली के मंदिर, पारंपरिक बौद्ध विहार और मठ, टेराकोटा मंदिर, पत्थर के स्तूप, महल, कलात्मक पुराने घर, सार्वजनिक आश्रय स्थल, और तालाबये सभी भक्तपुर की धरोहर हैं, जिसे 1979 में UNESCO ने विश्व धरोहर घोषित किया था।



प्रेयर ग्रुप और पारंपरिक डांस ग्रुप शहर में नई जान डाल रहे

जब गोरखा नरेश ने कांतिपुर अर्थात काठमांडू , ललितपुर अर्थात पाटन ,भाग्दा अर्थात भक्तपुर -इन तीन स्वतंत्र राज्यों को जीता तो नींव पड़ी  - आधुनिक नेपाल की- यहाँ तीन दरबार स्क्वायर है- 'दरबार' शब्द का अर्थ महल होता है- स्क्वायर- सार्वजनिक चौकों को कहा जाता है



दरबार स्क्वायर मे जाने आपको टिकट लेनी होती है -जो नेपाली लोगो के लिए कम है -सार्क देशो के लिए थोड़ी महंगी , बाकि कंट्री के लोगो  लिए ज्यादा महंगी है -यहाँ नहीं ग्रुप ऑफ़ टेम्पल्स है चारो तरफ शहर है  आप एक चौराहे से दुसरे चौराहे के मध्य मे बनी खूबसूरत इमारतों का अवलोकन करते है



इसके   अन्दर तोमड़्ही स्क्वायर ,दत्तात्रय स्क्वायर ,पोटरी स्क्वायर है



गोल्डन गेट ,माता तलूजा भवानी मंदिर,  पैलेस ऑफ़ ५५ विंडोज ,वत्सला टेम्पल,BIG BELL  ,पशुपतिनाथ टेम्पल, रेप्लिका ऑफ़ चार  धाम ,दत्तात्रय स्क्वायर मे दत्तत्रेय मंदिर - शहर का सबसे पुराना मंदिर है , peacock विंडो ,का आनंद लेते है  वही तोड़ी दूरी पर  तोमड़्ही स्क्वायर मे नवग्रह मंदिर, भैरवनाथ मंदिर ,देख सकते है









यहाँ 'जूजू धाऊ' (दही), चिउड़ा, काली टोपी, लाल बॉर्डर वाली काली साड़ी  मशहूर हैं।

 यहाँ हिंदू और बौद्ध धर्म के लोग रहते हैं।




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नेपाल - भक्तपुर -NEPAL -BHAKATPUR - 1100 YEARS OLD TEMPLES

  नेपाल के भक्तपुर के यह   प्राचीन मंदिर महज पूजा स्थल नहीं हैं, बल्कि ये   समृद्ध नेपाली   मंदिर दर्शन और तंत्र के रीती रिवाजो का मिश्रण है...