Sunday, 6 August 2017

जयपुर

जयपुर --मध्ययुगीन भारत का पहला योजनाबद्ध शहर है यह पिंक सिटी के नाम से भी प्रसीद है पुराने शहर में तीन मुख्य आकर्षण हैं। हवा महल ,सिटी पैलेस  और जंतर मंतर


सिटी पैलेस 

सिटी पैलेस को विद्याधर भट्टाचार्य और सर सैमुअल स्विंटन जैकब ने डिजाइन किया था इसका निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने करवाया था  पैलेस में किसी भी प्रवेश द्वार के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। त्रिपोलिया गेट (Tripolia Gate) शाही परिवार (Royal Family) के लिए आरक्षित है 





हवा महल 
जयपुर के बडी चौपड़ पर स्थित लाल और गुलाबी बलुआ पत्थरों से बना, हवा महल राजपूतों की शाही विरासत, वास्तकुला और संस्कृति का अद्भुत मिश्रण है। हवा महल को “पैलेस ऑफ विंड्स” भी कहा जाता है इस पांच मंजिला इमारत में 953 झरोखें हैं, हवा महल की खास बात यह है कि यह दुनिया में किसी भी नींव के बिना बनी सबसे ऊंची इमारत है।हवा महल का निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह के पोते सवाई प्रताप सिंह ने सन् 1799 में कराया था।




बिरला मंदिर 
जयपुर मे है तो अपने दिन की शुरुआत सफ़ेद संगमरमर से बने भगवान विष्णु को समर्पित बिरला मंदिर से करे -इसे लक्ष्मी नारायण मंदिर भी कहा जाता है मंदिर के बिलकुल सामने है मोती डूंगरी पैलेस



आमेर का क़िला


जलमहल

जल महल एक पांच मंजिला, लाल बलुआ पत्थर से र्निर्मित महल है, पांच मंजिलों में एक चार मंजिलें पानी में डूबी हुई है और आप केवल इसकी पांचवी मंजिल ही देख सकते हैं। महल की छत पर एक बगीचा है जिसे चमेली बाग कहते हैं इस महल में पर्यटकों को जाने की अनुमति नहीं है



जंतरमंतर
महाराजा जयसिंह ने इसका निर्माण 1727- 1794  में करवाया था



छतरी 


अल्बर्ट म्यूजियम 

अल्बर्ट हॉल वास्तुकला की इंडो सार्केन शैली को प्रदर्शित करता है राम निवास गार्डन के पास है -यहाँ आप लाखों साल पुरानी मम्मी को देख सकते है 



चिड़ियाघर 

जयपुर प्राणी उद्यान महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा वर्ष 1868 में बनाया गया था। उद्यान को 1877 में जनता के लिए खोला गया था। 

 

गोलचा गार्डन    


विधियाधर गार्डन 

यह उद्यान 1988 में जयपुर के मुख्य वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य की स्मृति में बनाया गया था। झीलों, फव्वारों, फूलों भित्ति चित्रों मुगल और राजपूत वास्तुकला का एक अनूठा मिश्रण,  दर्पण की नक्काशी प्रदर्शित करता है 

इसके इलावा जयगढ़ क़िला , नाहरगढ़ क़िला  ,रानी का बाग़ , गलता मंदिर , जगत मंदिर , चाँद बोडी, राजमंदिर सिनेमा   भी देखे -जयपुर मैं प्याज कचोरी , दाल भाटी ,मावा कचोरी , मसाला चाय , पान का आनंद ले I वाइट मेटल , लेहरिया कपडे , रजिस्थानी पगड़ी ,लाख की चुडिया , खरीदे  

जोहरी बाजार का लक्ष्मी मिष्ठान भंडार नाश्ते के लिए ,टोंक रोड पर टाइगर ट्रेल राजस्थान के  मांसाहारी खाने के लिए ,जोहरी बाज़ार शॉपिंग के लिए प्रसिद्द है


भारत के किले  इतिहास की वीरता, अनूठी वास्तुकला और शाही विरासत के प्रतीक हैं। जो भारतीय संस्कृति और वास्तुकला का अद्भुत संगम पेश करते हैं।

जयपुर की शान… इतिहास की पहचान -आमेर किला राजपूताना शौर्य और मुगल-राजपूत वास्तुकला का एक भव्य प्रतीक है।

जयपुर के केंद्र से मात्र 11 किलोमीटर दूर स्थित आमेर किला कभी आमेर के शासकों का प्रिय निवास स्थान था, लेकिन आज यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ,एक बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।

माओटा झील के किनारे पीले-गुलाबी बलुआ पत्थर से बना है यह किला राजा मानसिंह प्रथम द्वारा निर्मित और बाद में सवाई जयसिंह द्वारा विकसित

किले की ऊँची इमारत तक पहुँचने के लिए कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन आप हाथी की सवारी करके शाही अंदाज में प्रवेश कर सकते हैं। यदि आप अधिक पारंपरिक राजस्थानी अनुभव चाहते हैं, तो ऊँट की सवारी का आनंद लें।

 

चाहे आप इसके पूर्व निवासियों के रहस्यों को जानना चाहते हों या बस आसपास के मनमोहक दृश्यों में खो जाना चाहते हों, आमेर किला, जिसे प्यार से 'अंबर पैलेस' भी कहा जाता है, अपनी राजसी भव्यता को उजागर करने के लिए आपका स्वागत करता है।

 

सूरज पोल से गुजरते ही आपकी जिज्ञासा और बढ़ जाती है, जो कि एक भव्य मुख्य द्वार है और जलेब चौक की ओर जाता है, जो कभी सेना का परेड मैदान हुआ करता था। यह वही स्थान है जहाँ सैनिक अपनी विजयों का प्रदर्शन जनता के सामने करते थे।

चांद पोल दरवाजा, पहले आम लोगों के प्रवेश के लिए था। इस आर्कषक पोल के सबसे ऊपरी मंजिल में नौबतखाना बना था, जिसमें ढोल, नगाड़े एवं तबला समेत कई संगीत एवं वाद्य यंत्र बजाए जाते थे।

 

जलेब चौक से  दो तरफ सीढ़ियां दिखाई देती हैं, जिनमें से एक तरफ की सीढि़यां राजपूत राजाओं की कुल देवी शिला माता मंदिर की तरफ जाती हैं। वहीं दूसरी तरफ की सीढ़ियां सिंहपोल द्धवार की तरफ जाती हैं।

इस विशाल दुर्ग के बने 7 बेहद आर्कषक औऱ सुंदर द्धारों में से एक है।

आपका अगला पड़ाव दीवान   -ए-आम होगा, जो जनता के लिए समर्पित एक हॉल है, जहाँ शासक अपने नागरिकों से आमने-सामने मिलते थे और उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं को ध्यान से सुनते थे।

मावठा झील में आमेर किले व महल का प्रतिबिम्ब और इसके नीचे की तरफ बनी ’केसर क्यारी’ को देखकर पर्यटक आनन्दित होते हैं।

दक्षिण की तरफ  गणेश पोल द्धवार स्थित है, इस द्दार के ऊपर भगवान गणेश जी की एक छोटी सी मूर्ति शोभायमान है, इसलिए आमेर किले के इस द्धार को गणेश द्धार कहा जाता है।

सुख निवास, जिसे सुख महल भी कहा जाता है, चंदन की लकड़ी के अपने सुंदर प्रवेश द्वार से आपका स्वागत करता है। महल में जल-आपूर्ति वाली पाइपों के साथ एक आगे एक उल्लेखनीय वातानुकूलित वातावरण प्रदान करती थी।

 इस किले में जस मंदिर, ज़नाना (जहाँ महिलाएँ रहती थीं), शाही उद्यान और मान सिंह का महल जैसे कई अन्य आकर्षण भी हैं।

लेकिन आमेर किले का असली रत्न शीश महल है, जिसे दर्पणों का महल भी कहा जाता है। इस भव्य कक्ष में प्रवेश करते ही आप दीवारों और छतों पर लगे हजारों छोटे-छोटे दर्पणों से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं, जो प्रकाश को ग्रहण करके उसे बहुरंगी रंगों में बदल देते हैं।

किले की विशाल दीवारों के नीचे सुरंगों का एक जाल बिछा है, जो इसे विशाल जयगढ़ किले से जोड़ता है। इन सुरंगों के कुछ हिस्सों को सावधानीपूर्वक पुनर्स्थापित किया गया है, जो अतीत की झलक पेश करते हैं, जबकि अन्य अभी भी रहस्य में डूबे हुए हैं।

इस सबसे विशाल किले में रोजाना शाम को लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाता है। शाम के प्रकाश और ध्वनि शो के दौरान अंबर किले की सुंदरता सचमुच जीवंत हो उठती है। यह शो करीब 50 मिनट तक चलता है।

1 comment:

  1. जयपुर के दर्शनीय स्थल में सबसे बेहतरीन है हवा महल. और अधिक जानने के लिए क्लिक करें - जयपुर दर्शनीय स्थल

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पुष्कर

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