Saturday, 5 August 2017

डेरा बाबा वडभाग सिंह, मैड़ी

 मान्यता के अनुसार वर्ष 1761 में पंजाब के कस्बा करतारपुर से सिख गुरु अर्जुन देव जी के वंशज बाबा राम सिंह सोढी और उनकी धर्मपत्नी माता राजकौर के घर में वडभाग सिंह का जन्म हुआ था।  बाबा वडभाग सिंह बाल्यकाल से ही अध्यात्म को समर्पित थे। एक दिन वह घूमते हुए दर्शनी खड्ड, पहुंचे और एक बेरी के वृक्ष के नीचे ध्यानमगन हो गए। यह क्षेत्र वीर नाहर सिंह नामक एक पिशाच के प्रभाव में था।


 बाबा वडभाग सिंह जी ने दिव्य शक्ति से नाहर सिंह को काबू करके बेरी के वृक्ष के नीचे एक पिंजरे में कैद कर लिया। बाबा वडभाग सिंह ने उसे इस शर्त पर आजाद किया कि वीर नाहर सिंह अब बीमार और बुरी आत्माओं के शिकंजे में जकड़े लोगों को स्वस्थ करेंगे बेरी का पेड़ आज भी यहां मौजूद है और डेरा बाबा वडभाग सिंह नामक धार्मिक स्थल के साथ सटा है। 
 डेरा बाबा वडभाग सिंह के दरबार में बुरी आत्माओं व मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है।


जिस स्थान पर बाबा जी ने तपस्या की थी उसे मंजी साहब कहा जाता है।


वडभाग सिंह की छोटी बहन  - बीबी भानी।   माता राज कौर जीकी समाधी





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