लोढ़ा धर्मशाला
आना सागर झील — 12वीं शताब्दी में राजा आनाजी चौहान द्वारा निर्मित एक कृत्रिम झील। यह 13 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और इसके चारों ओर दौलत बाग जैसे हरे-भरे बगीचे हैं।
Khwaja Gharib Nawaz Dargah Sharif-
अजमेर शरीफ की दरगाह 13वीं सदी के सूफी संत, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का अंतिम विश्राम स्थल है। मकबरे
का सफेद संगमरमर का गुंबद 1532 में बनाया गया था और यह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का
उदाहरण है। परिसर में कई संरचनाएं और आठ प्रवेश द्वार हैं, हालांकि आज केवल तीन का
उपयोग किया जाता है। निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री में संगमरमर, ईंट और
बलुआ पत्थर शामिल हैं। 1570 ईस्वी में अकबर द्वारा निर्मित मुख्य मेहराब 56 फीट ऊंची
है।
Adhai-Din Ka Jhonpra-
इस मस्जिद को सिर्फ 60 घंटे अर्थात अढ़ाई दिन में तैयार किया गया था। इस कारण इसका नाम अढ़ाई दिन का झोपड़ा पड़ गया। यह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला पर आधारित है।
पृथ्वीराज स्मारक
नासियां जैन मंदिर –
नासियां मंदिर, जिसका निर्माण 1865 में हुआ था, अजमेर में पृथ्वी राज मार्ग पर स्थित है। इसे 'लाल मंदिर' (Red Temple) के नाम से भी जाना जाता है और यह भगवान आदिनाथ को समर्पित है
तारागढ़ किले के द्वार—
तारागढ़ किले का निर्माण 12वीं शताब्दी ईस्वी में चौहान साम्राज्य के शासनकाल के दौरान किया गया था।
waste of time -totally ruins
Victoria
Jubilee Clock Tower




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