Saturday, 11 May 2024

झुंझुनू -रानी सती मंदिर -खेमी सती मंदिर -

 


रंग बिरंगे खूबसूरत रोशनियों से नहाया हुआ, उत्तरी भारत के सबसे अमीर मंदिरो मे से एक , स्त्री शक्ति का प्रतीक ,मंदिर है रानी सती का मंदिर –




 झुंझुनू के रानी सती के मंदिर -जो एक राजस्थानी महिला रानी सती को समर्पित है,





झुंझुनू एक पुराना और ऐतिहासिक शहर है यह जयपुर से 180 किमी और दिल्ली से 245 किमी दूर स्थित है।

ऐसा कहा जाता है कि इस शहर का नाम झुंझा या जुझार सिंह नेहरा नामक जाट नेता की याद में रखा गया था। हम ठीक से नहीं जानते कि ऐसा कब हुआ। लेकिन इस नाम का उल्लेख 15वीं शताब्दी के कई दिगंबर ग्रंथों में पाया गया है।




श्री राणी सतीजी मंदिर  91- 1592 232755,

रानी सती का वास्तविक नाम नारायणी बताया जाता है। जो 13 वीं और 17 वीं शताब्दी के बीच में रहती थी  कहानियों के अनुसार एक युद्ध के दौरान नारायणी देवी/रानी सती के पति की मौत हो जाती है जिसके बाद वो भी सती हो गई थी। अब यह मंदिर सटी प्रथा का विरोध करता है मंदिर परिसर मे बड़े अक्षरों मे यह लिखा गया है


 

मंदिर सुबह पांच से दोपहर एक बजे तक शाम तीन बजे से रात दस बजे तक खुलता  है मंदिर मे रहने लिए हज़ारो कमरे है जो 100 रुपए से 800 रुपए तक के है ac non ac दोनों प्रकार के रूम है हमें जो खास लगी हमारे ac कमरे मे रूम हीटर water cooler यहाँ तक की स्लीपर भी available थी  दोपहर तथा रात  का भोजन केवल 50 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से मंदिर मे उपलब्ध है



यह मंदिर सदियों पुराना है। मंदिर में नारायणी देवी को, शक्ति का प्रतिनिधित्व करने वाला त्रिशूल के प्रतीक के रूप मे पूजा जाता है





इस मंदिर परिसर में 16 देवियों की मूर्तियां ,शिव, हनुमान, सीता, भगवान गणेश
 मंदिर भी हैं। मंदिर में प्रसाद की सुविधा के अलावा, दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक कैंटीन भी है।




2.       Shree Khemi Sati Temple- JHUNJHUNU - यह मंदिर हिंदू देवी खेमी सती को समर्पित है, ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर राठौड़ वंश के शासकों द्वारा बनाया गया था, इसमें 50 से अधिक कमरे हैं, एसी और नॉन-एसी दोनों




















3.       Panchdev Mandir - Baba Gangaram Dham राजस्थान के झुंझूनूं शहर के पंचदेव मंदिर परिसर में प्राचीन शिल्पकला की नागर शैली में 24 नक्काशीदार खंभों पर मंदिर का निर्माण किया गया है. जिसमें दिशा व नक्षत्रों के अनुसार गणना कर मंदिर की लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई का माप वास्तुशिल्प के आधार पर निर्धारित की गई है.

खंभों को ओडीशा के कारीगरों ने तराशा है.  16 फीट ठोस काले पत्थर की नींव पर बने इस मंदिर की लंबाई 72 फीट, चौड़ाई 46 फीट व ऊंचाई 65 फीट है. करीब 3000 टन संगमरमर लगा है. सीमेंट, चूना, लोहा व स्टील का प्रयोग नहीं किया गया है.


मंदिर में मुख्य शिखर सहित पांच गुंबद है.

झुंझुनूं में गंगादशहरा के पावन दिन 1975 में उन्होंने पंचदेव मंदिर की स्थापना की. मंदिर में बाबा गंगाराम सहित श्री शिव परिवार, पवनपुत्र हनुमान, मां दुर्गा एवं मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित हैं.


दरगाह हज़रत कमरुद्दीन शाह

एक मुस्लिम संत - कमरुद्दीन शाह की कब्र है। उनका जन्म 1784 में हुआ था।


 यह एक परिसर है जिसमें 'मदरसा', एक मस्जिद और एक 'महफिलखाना' शामिल हैं। यह संरचना 1841 में मेजर फोर्स्टर के नवजात बेटे के निधन पर बनाई गई थी।


 संत कमरुद्दीन शाह की दरगाह हिंदू मुस्लिम सद्भाव में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। दोनों समुदायों के बीच इस सौहार्द का एक अजीब चित्रण प्रवेश द्वार पर 'स्वस्तिक' चिन्ह के रूप में देखा जा सकता है।






MANSA DEVI 









Tuesday, 7 May 2024

सालासर बालाजी -दाढ़ी मूछ वाले हनुमान जी का मंदिर

 


क्या आपने ऐसे किसी मंदिर के बारे सुना है जहाँ पर हनुमान  जी की दाढ़ी व मूंछे है

एक मंदिर जिसकी कुछ रोचक बातें आपको हैरान कर देंगी

भारत के एक मात्र दाढ़ी मूछ वाले हनुमान जी का मंदिर  ,जहाँ भगत हनुमान जी को नारियल चढ़ा कर मन्नत मानते है



यहाँ  पर हनुमान  जी को बाला जी के  नाम से पूजा जाता है 

बाला जी के प्रकट होने की कथा जितनी ही चमत्कारी है उतने ही बाला जी भी चमत्कारी और भक्तों की मनोकामना पूरी करने वाले हैं

बालाजी के बारे में एक बड़ी रोचक बात यह है क‌ि इनके मंद‌िर का न‌िर्माण करने वाले मुसलमान कारीगर थे। इनमें नूर मोहम्मद और दाऊ का नाम शाम‌िल है।

300 वर्ष से यहाँ अखण्ड धुना जल रहा है

यह मंदिर सालासर  बालाजी के नाम से विख्यात है


सालासर कस्बा, राजस्थान में चूरू जिले का एक हिस्सा है यह सीकर से 57 किलोमीटर, सुजानगढ़ से 24 किलोमीटर और लक्ष्मणगढ़ से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नजदीकी हवाईअड्डा जयपुर से  सालासर पहुँचने में 3.5 घंटे का समय लगता है।


नागौर जिले में असोटा गाँव का एक किसान अपने खेत को जोत रहा था।अचानक उसे मिट्टी में सनी बालाजी भगवान श्री हनुमान की मूर्त्ति थी। बालाजी ने असोटा के ठाकुर को सपने में आकर आदेश दिया कि इस मूर्त्ति को सालासर भेज दिया जाए। मूर्त्ति को सालासर भेज दिया गया   मोहनदास जी ने निर्देशित किया कि “बैल जहाँ पर भी रूकेंगे, वहीं पर मूर्ति की स्थापना होगी”| बैल रेत के टीले पर जाकर रूक गये  सन् 1755 शनिवार के दिन श्री बालाजी महाराज की मूर्ति की स्थापना की गई। 




 प्रारंभ में, मंदिर, एक मिट्टी-पत्थर की संरचना थी।
   later  पूरी गर्भगृह को सोने और चांदी के कार्यों से सजाया गया । यहां तक कि बर्तन भी चांदी से बने हैं। बालाजी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार संगमरमर से बनाया गया



यहाँ की मान्यता है की मात्र नारियल बांधने से बालाजी महाराज सभी इच्छाओं को पूरी करते है।बालाजी की प्रतिमा शालिग्राम पत्थर की है जिसे सिंदूरी रंग और सोने से सजाया गया है।

 

प्रतिष्ठा के समय से ही मन्दिर के अन्दर दीप प्रज्वलित है।


मोहनदास जी का अखण्ड धूंणा है, श्री मोहनदास जी और मोहनदास जी की बहन दादी की समाधी  बालाजी मंदिर के पास स्थित है




अंजनी माता का मंदिर 






अयोध्या-SRI RAM MANDIR

  सरयू नदी के तट पर बसी , ऐतिहासिक नगरी , प्रभु श्री राम की जन्मस्थली , मोक्षदायिनी अयोध्या , भारत के   सात पवित्र नगरों मे...