Friday, 20 March 2026

पुष्कर




वराह घाट जहां शाम को आरती होती है



ब्रह्मा घाट




सावित्री माता मंदिर



old door of a house 

,,,,,

ब्रह्मा घाट




गुरुद्वारा साहिब-. 

श्री गुरु नानक देव जी 1511 में श्रीलंका से वापस आते समय अजमेर और पुष्कर में आये थे। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी तलवंडी साबो से नांदेड़ जाते समय यहां आये थे।





राम वैकुंठ नाथ स्वामी मंदिर, 

जिसे 'न्यू रंग नाथ जी मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है, भक्ति और स्थापत्य कला की उत्कृष्टता का एक भव्य प्रतीक है। यह विशाल परिसर 20 बीघा भूमि पर फैला हुआ है।


वराह मंदिर

वराह मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी ईस्वी में राजा अनाजी चौहान ने करवाया था। वराह मंदिर को नष्ट कर दिया गया था, और फिर 18वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण किया गया।







0ld rang ji mandir  

1823 में हैदराबाद के एक अमीर व्यापारी द्वारा बनवाया गया यह मंदिर, दक्षिण भारतीय, राजपूती और मुग़ल वास्तुकला शैलियों का mixture है; इसकी पहचान इसके ऊँचे गोपुरम मीनार  बारीक नक्काशी और शानदार भीतरी सज्जा से होती है।











welcome gesture by local police




local man in traditional dress 


 

AJMER-अज़मेर






लोढ़ा धर्मशाला 


आना सागर झील — 12वीं शताब्दी में राजा आनाजी चौहान द्वारा निर्मित एक कृत्रिम झील। यह 13 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और इसके चारों ओर दौलत बाग जैसे हरे-भरे बगीचे हैं।



Khwaja Gharib Nawaz Dargah Sharif- 

अजमेर शरीफ की दरगाह 13वीं सदी के सूफी संत, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का अंतिम विश्राम स्थल है। मकबरे का सफेद संगमरमर का गुंबद 1532 में बनाया गया था और यह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का उदाहरण है। परिसर में कई संरचनाएं और आठ प्रवेश द्वार हैं, हालांकि आज केवल तीन का उपयोग किया जाता है। निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री में संगमरमर, ईंट और बलुआ पत्थर शामिल हैं। 1570 ईस्वी में अकबर द्वारा निर्मित मुख्य मेहराब 56 फीट ऊंची है।






Adhai-Din Ka Jhonpra- 

इस मस्जिद को सिर्फ 60 घंटे अर्थात अढ़ाई दिन में तैयार किया गया था। इस कारण इसका नाम अढ़ाई दिन का झोपड़ा पड़ गया।  यह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला पर आधारित है।





पृथ्वीराज स्मारक


नासियां ​​जैन मंदिर –

नासियां ​​मंदिर, जिसका निर्माण 1865 में हुआ था, अजमेर में पृथ्वी राज मार्ग पर स्थित है। इसे 'लाल मंदिर' (Red Temple) के नाम से भी जाना जाता है और यह भगवान आदिनाथ को समर्पित है




तारागढ़ किले के द्वार—

तारागढ़ किले का निर्माण 12वीं शताब्दी ईस्वी में चौहान साम्राज्य के शासनकाल के दौरान किया गया था।
waste of time -totally ruins



Victoria Jubilee Clock Tower


 

Thursday, 9 October 2025

TAMIL NADU - TOURIST PLACES

 


TAMIL NADU - TOURIST PLACES 

Historical and Cultural Sites:

Mahabalipuram:

Kanchipuram:

Madurai:

Thanjavur:---Brihadeeswarar Temple, a UNESCO World Heritage site,

Vellore:-the Vellore Fort, a historic fort known for its architecture and historical significance.

Tiruchirappalli:Rock Fort Temple and Sri Ranganathaswamy Temple, a significant pilgrimage site.

Chennai: The capital city,

Velankanni: A popular pilgrimage town known for the Basilica of Our Lady of Good Health.

Coimbatore: A major industrial city with temples and other attractions.

Hogenakkal Falls: A scenic waterfall known for its therapeutic waters and boat rides.

Hill Stations:

Ooty:

Kodaikanal:

Yercaud:

Coonoor

Yelagiri:

Beaches:

Marina Beach (Chennai):

Kanyakumari:

Rameswaram:


गेहूं का हलवा तमिलनाडु की प्रसीद मिठाई है मदुराई मे आपको हलवे की बहुत दुकाने मिलेगी परन्तु इस हलवे की खोज मदुरै  से 150  किलोमीटर दूर तिरु नेल वेली  नामक स्थान पर हुई   -    इसे गोधुमाई हलवा या  तिरुनेलवेली हलवा भी कहा जाता है ।स्थानीय भाषा मे इसे  'इरुतु कड़ाई हलवा' भी कहा जाता है। तिरुनेलवेली हलवे को इज्जाद करने का  श्रेय राजपूत शेफ Mr. Jegan Singh,को जाता है

 इरुतुकादाई हलवा नामक एक दुकान ने लोकप्रिय बनाया, जो 1882  में खोली गई थी और जो केवल evening सूर्य उधय के समय ही मिठाई बेचते थे

 हलवा बनाना एक जटिल काम है ,  भीगे हुए गेहूँ को हाथ से पीसकर तीन बार दूध निकाला जाता है , उसे कुछ घंटों के लिए रखा जाता था और फिर उसे  , घी,  चीनी और काजू के साथ धीमी आँच पर पकाकर और हिलाकर पकाया जाता है। इसमें लाल गेहूँ का इस्तेमाल किया जाता है

 

गेहूँ का हलवा बनाने के दो तरीके हैं।

 

पारंपरिक विधि: इस विधि में गेहूँ के दानों को भिगोकर, दूध निकालकर, मनचाहा गाढ़ापन आने तक पकाया जाता है। हालाँकि इसमें समय लगता है, लेकिन स्वाद बहुत अच्छा होता है।

आसान विधि: यह गेहूँ के आटे से बनने वाली सबसे आसान विधियों में से एक है, जिसमें स्वाद से कोई समझौता नहीं किया जाता। हालाँकि इस विधि में आटे को भिगोना पड़ता है, लेकिन दूध निकालने में पारंपरिक विधि जितनी मेहनत और समय नहीं लगता।

Wheat (samba): 1kg

Sugar: 4 kg

Ghee: 3 kg

आटा हलवा

बादाम हलवा

दूध का हलवा


अयोध्या-SRI RAM MANDIR

  सरयू नदी के तट पर बसी , ऐतिहासिक नगरी , प्रभु श्री राम की जन्मस्थली , मोक्षदायिनी अयोध्या , भारत के   सात पवित्र नगरों मे...