Monday, 26 June 2017

पठानकोट

पठानकोट

इस शहर का इतिहास तो बहुत पूराना है परन्तु इसे जिले का दर्जा 27th july 2011 को ही मिला है शिवालिक की पहाड़ियों मैं स्तिथ इसकी सीमाएं हिमाचल , जम्मू , पाकिस्तान को छूती है पठानकोट ने आज़ादी स पहले और बाद मैं हर बार युद्ध की पीड़ा को झेला है इसी लिए यहाँ एशिया ki सबसे बड़ी कैंटोनमेंट है पंजाब की 2 मुख्या नदिया रवि तथा ब्यास शहर के दोनों और बहती है ` विष्णु पुराण अनुसार औदुंबरा नमक राज्य की राजधानी प्रतिष्ठान नमक जगह पर थी वही आज का पठानकोट है September 326 B.C  alaxandar की सेना भी काठा ( आज के काठगढ़ ) के पास से वापिस गयी थी 11th A.D मैं दिल्ली के राजा झेत पाल ने इस जगह को जीता और इसका नाम पैठान रख दिया जो बाद मैं पठानकोट बना


मुक्तेश्वर महादेव मंदिर

यहाँ 5500  साल पुराणी caves है मान्यता  अनुसार ये पांडवों ने बनवाई थी रावी  नदी जे किनारे  बना यह मंदिर पठानकोट से 14 K.M दूर है  



 दुर्गा माता मंदिर





ध्रुवा पार्क 



रघुनाथ मंदिर 


चर्च 



  नागनी माता मंदिर

यह पठानकोट से 25 K.M  की दूरी पे है

यह अद्वितीय मंदिर है जहां नागनी माता की मूर्ति है वहां नीचे से पानी आता है जिन लोगों को साँप काट लेते हैं वह माता के पास आते हैं और बस पीने के पानी और मिटटी को लगा कर पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं





भरमाड़ आश्रम
यह पठानकोट से 40 K.M  की दूरी पे है



नूरपुर का क़िला

राजा बासु ने  यह क़िला अपने शासन  कॉल(1580-1603) मैं बनवाया था इस क़िले मैं ब्रिज राज स्वामी मंदिर है यह विश्व का  एक ही मंदिर है जहाँ पे कृष्ण तथा मीरा की पूजा एक ही जगह की जाती है लोक मान्यता अनुसार यहाँ मंदिर मैं वही मूर्ति है जिसकी मीरा पूजा किया करती थी


नूरपुर के इस किले में जहांगीर ने भी कुछ समय राज किया था। उस समय जहांगीर की पत्नी नूरजहां भी यहां आई थी। इसके बाद ही इस स्थान का नाम नूरपुर पड़ा था। जबकि इस स्थान को पहले धमड़ी कहा जाता था।


किले का प्रवेश द्वार






किले के अंतिम शासक राजा जगत सिंह के समय में ही यहां बृज  मंदिर की भी स्थापना हुई। इस मंदिर में भगवान की कृष्ण व साथ में मीरा की मूर्ति है। इस मंदिर में अब भी रात को मीरा के घुंघरुओं की आवाज सुनाई देती है।






ढ़ीबकेश्वर महादेव मंदिर सुल्याली

यहाँ भगवन शिव का छोटा सा मंदिर है परन्तु यहाँ पे बहने वाला झरना आप की सारी थकान मिटा देगा यह बहुत ही शांत भीड़ भाड़ से दूर जगह है  पठानकोट से आपको नूरपुर जाना होगा वहां से  सुल्याली 14 K.M है


काठगढ़ शिव मंदिर
यह पठानकोट से 30 K.M दूर है यहाँ के मंदिर की अद्भुत तथा हैरान करने वाली  भगवान शिव पारवती की शिला दो भागों मैं बंटी है जो ऋतू के बदलने के साथ एक दुसरे के पास आती है व दूर हो जाती है










लक्ष्मी नारायण मंदिर









Sunday, 25 June 2017

एल्लोरा गुफ़ाएं


 एल्लोरा एक पुरातात्विक स्थल है  जो भारत में औरंगाबाद शहर 

 महाराष्ट्र से 30 K.M  की दूरी पर स्थित है।


एलोरा युनेस्को द्वारा घोषित एक विश्व धरोहर  है।यहां 34 "गुफ़ाएं" हैं ये गुफाएँ 350 से 700 A.D के दौरान अस्तित्व में आईं।  इसमें  हिन्दू, बौद्धऔर जैन गुफ़ा मन्दिर बने हैं। ये 5th और 10th 

शताब्दी में बने थे। यहां 12 बौद्ध गुफ़ाएं (1-12 no ) (महायान संप्रदाय 


पर आधारित)  , 17 हिन्दू गुफ़ाएं (13-29 no ) और 5 जैन गुफ़ाएं (30-


34 no ) हैं। एलोरा की गुफाओ को वेरुल के लेनी के नाम से भी जाना जाता है
।Cave nos. 10 (Visvakarma Cave), 16 (Kailasa), 21 (Ramesvara) and 32 & 34 (Jaina group of caves) सबसे शानदार है


एलोरा का बहु-मंजिल कैलासगुहा मन्दिर (गुफा 16), सर्वाधिक 

उत्कृष्ट है जिसका निर्माण राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम(757-  83 

A.D.)     ने कराया था।जो दुनिया भर में एक ही पत्‍थर की शिला से 

बनी हुई सबसे बड़ी मूर्ति है। कैलासगुहा मन्दिर  रथ के आकार का है

























 गुफ़ा न.10, निर्माण के देवता विश्वकर्मा भगवान जी को समर्पित है 

इसलिए इस गुफ़ा को विश्वकर्मा गुफ़ा कहते हैं। गुफ़ा के अंदर भगवान 

बुद्ध की 15 फ़ीट की मूर्ति उपदेश देने की मुद्रा में विराजमान है।





























 गुफा 30 -  कैलाशा नाम से प्रसिद्ध यह गुफा थोड़ी अधूरी रह गई थी। 

इसमें भगवान महावीर का एक चित्र सिंहासन पर बैठे हुए बना है।
गुफा 32 -  इंद्र सभा के नाम से विख्‍यात यह गुफा जैन धर्म के संस्थापक भगवान महावीर को समर्पित है। दो मंजिला बनी इस गुफा में एक मंदिर है जिसे मनस्‍तम्‍भ कहा जाता है और बगल में  बायीं ओर एक हाथी भी बना हुआ है।
गुफा 33 -  इस गुफा को जगन्नाथ सभा के रूप में जाना जाता है, इसमें चित्रों और मूर्तियों के अलावा कुछ खास नहीं है।



यह गुफा का वो खम्बा  है जिसको बजाने पर ढोलक की आवाज आती है












दाई मूर्ति के बिलकुल सामने खड़े हो कर आप मॉडर्न microphone system  से आवाज फैलने का मज़ा ले सकते है



गुफा 32 मैं बना एक पेंटिंग  

अयोध्या-SRI RAM MANDIR

  सरयू नदी के तट पर बसी , ऐतिहासिक नगरी , प्रभु श्री राम की जन्मस्थली , मोक्षदायिनी अयोध्या , भारत के   सात पवित्र नगरों मे...