Monday, 1 June 2020

भारत का स्विटरज़रलैंड -खजियार- हिमाचल

डलहौजी

1854 मैं ब्रिटिश राज मैं इस जगह को गर्मियों से निजात पाने के लिए चुना था  ये 5 पहाड़ियों पे स्तिथ है  Scottish , Victorian art की  बिल्डिंग एवं चर्च  इस कूल पहाड़ी शहर की पहचान है

डलहौज़ी का नाम Sir Donald  mcleod  की शिफारिश पे 1854 मैं लार्ड डलहौज़ी के  नाम पे पड़ा
St Francis church

1894  मैं  बना यह चर्च सुभाष चौक मैं है






















गाँधी चौक



 St John church

गाँधी चौक मैं स्तिथ ये चर्च जॉन हेनरी ने 1863 क्रिस्चन लोगो  से दान ले कर  बनवाया था


 पंचपुला

यहाँ पे शहीद भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह की समाधि है GPO जिसे अब गाँधी चौक भी कहा जाता है  से पंचपुला  जाते आप सात धारा वाटर फॉल का आनंद भी उठा सकते है  2036 मीटर्स उच्चाई से गिरता वाटर फॉल अब केवल बरसात के मौसम ही दिखाई देता है








 सुभाष चौक 





 खजियार

जिला चम्बा  डलहौज़ी से दूरी 24 K.M

On 7 July 1992, Mr. Willy T. Blazer,जो वाईस कौंसिलर Switzerland  के थे इसे वर्ल्ड टूरिस्ट मैप पे ले कर आये और इसे "Mini Switzerland" का नाम दिया
 खजियार झील

घास के 4k.m एरिया मैं फैले मैदान मैं वाछा  घास से ढकी एक छोटी सी झील है  चारों और चिनार के पेड़ है जो इस जगह की ख़ूबसूरती मैं 4 चाँद लगा देते है

 खजियार मंदिर

मैदान के पास ही एक लकड़ी से बना खाजी नाग देवता का चम्बा के राजा प्रीती सिंह  द्वारा बनवाया 12 A.D  का पुराना मंदिर है  मंडप पे पांडवो की मुर्तिया वुड कार्विंग  से बनी है










 माँ जगदम्बे मंदिर

खज्जियार से 5  k.m  दूर माँ जगदम्बे का मंदिर है थोड़ी दूरी पे शिव का 85  फुट बड़ा मूर्ति है






विचित्र और चमत्कारी मंदिर

यमराजमंदिर ---

भारत के एक ऐसा मंदिर जहा लोग अन्दर जाने से डरते है - 
जी -हमारे भारत मैं एक ऐसा मंदिर भी है जहाँ लोग बाहर से ही माथा टेक् देते है - यह मंदिर है यमराज देवता का - इसमें कमरा यमराज के सचिव चित्रगुप्त का भी है जो मान्यता अनुसार हमारे कर्मो का हिसाब किताब रखते है - एक है यमराज की कचहरी - यह मंदिर भरमौर के चौरासी मंदिर मैं स्तिथ है - इस बार मणिमहेश की यात्रा पर जाये तो जरूर दर्शन करे -पास ही है अढ़ाई पौड़ी - मांन्यता अनुसार अकाल मृत्यु के शिकार वयक्ति के लिए यहाँ पिंड दान होता है - मैंने ऐसा सुना है पर देखा नहीं है - कोई भरमौर का आदमी इस बारे मैं मेरी जानकारी को बड़ा सकता है तो जरूर सम्पर्क करे - यह मंदिर प्रसीद भरमौर  के चौरासी मंदिर के प्रांगण मैं स्तिथ है-भरमौर- जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश मैं है -चम्बा से 60 किलोमीटर दूर है -पठानकोट नजदीकी रेलवे स्टेशन है 

कृष्ण की मक्खन गेंद-

तस्वीर देख कर तो आपको यही लगेगा की एक छोटा सा धक्का -और यह भरी भरकम चट्टान लुढ़कती चली जाएगी तो आप गलती कर रहे है लोग इस पत्थर को कृष्ण की मक्खन गेंद भी कहते हैं क्योंकि उनका मानना है की यह पत्थर मक्खन की गेंद है जिसको कृष्ण ने अपनी बाल्य अवस्था में नीचे गिरा दिया था।सन् 1908 में इस पत्थर पर उस समय के मद्रास गवर्नर आर्थर की नजर पड़ी तो उनको लगा कि यह पत्थर किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है इसलिए उन्होंने इस पत्थर को उसके स्थान से हटवाने के लिए 7 हाथियों से खिंचवाया पर यह पत्थर अपनी जगह से 1 इंच भी नहीं खिसका।
1200 वर्ष पुराना गुरुत्वाकर्षण के नियमों की उपेक्षा करते हुए यह पत्थर एक ढलान वाली पहाड़ी पर 45 डिग्री के कोण पर बिना लुढ़के टिका हुआ है। इस पत्थर की चौड़ाई 5 मीटर तथा ऊंचाई 20 फीट है।
यह आस्था की गेंद इतिहास मैं सबसे बड़े दानी महाबली के नाम पर प्रसीद हुए महाबलीपुर शहर -मद्रास -जिसे अब चेन्नई के नाम से जाना जाता है से केवल 120 किलोमीटर दूर महाबलीपुर मैं

बाला जी मंदिर उन्नाव 
भारत का एक ऐसा मंदिर जिसमे पिछले 400 सालो से देसी घी चढ़ाया जाता है - आज मंदिर के पास 5000 क्विंटल घी है -घी को यहाँ कुए मैं रखा जाता है अभी तक 7 कुए भर चुके है -बाला जी सूर्यदेव का मंदिर -उन्नाव मैं है





एक ऐसा मंदिर जहां की मिट्टी से होता है सांप के काटे जाने का इलाज़ ---




नागनी माता मंदिर हिमाचल



नागनी माता मंदिर एक ऐसा मंदिर जहां की मिट्टी से सांप के काटे जाने का इलाज़ होता है यह अद्वितीय मंदिर है जहां नागनी माता की मूर्ति है वहां नीचे से पानी आता है जिन लोगों को साँप काट लेते हैं वह माता के पास आते हैं और बस पीने के पानी और मिटटी को लगा कर पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं यह पठानकोट से 25 K.M  की दूरी पे है इस एरिया मैं ऐसे दो मंदिर है एक को छोटी नागिनी दूसरे को बड़ी नागिनी कहा जाता है - एक विश्वास के अनुसार कोई भी सांप का काटा हुआ हुआ व्यक्ति जब तक मंदिर की हद मैं रहता है उसकी मृत्यु भी नहीं होती है - पुजारी की आज्ञा के बिना ऐसा व्यक्ति मंदिर के बाहर नहीं जा सकते सावन माह मैं प्रत्येक रविवार यहाँ मेला लगता है




राम का एक ऐसा मंदिर भी है जहाँ उन्हें रोज गार्ड सलामी देते है 


आप ने अयोध्या के राम मंदिर के बारे मैं सुना होगा परन्तु क्या आप ने सुना है की राम का एक ऐसा मंदिर भी है जहाँ उन्हें रोज गार्ड सलामी देते है - दुनिया का एक मात्र राम का मंदिर जहाँ उनकी पूजा राम भगवन के रूप मैं नहीं राजा राम के रूप मैं होती है - यह मंदिर है - बुंदेलखंड के महलों के शहर ओरछा मैं - इसके साथ जुडी है एक विचित्र कहानी- कहते है ओरछा नरेश मधुकरशाह कृष्ण भक्त थे लेकिन रानी गणेशकुंवरि राम भक्त थीं। राजा ने रानी को वृन्दावन चलने को कहा रानी ने वृंदावन जाने से मना कर दिया। क्रोध में आकर राजा ने उनसे यह कहा कि तुम इतनी राम भक्त हो तो जाकर अपनेराम को ओरछा ले आओ।रानी ने प्रभु राम की तपस्या की उनके दर्शन करके उनकी आज्ञा से वो एक मूर्ति  लेने चली गयी   रानी इस मूर्ति को (1554-92) के दौरान अयोध्या से लाई - राजा मधुकरशाह ने करोडों की लागत से चतुर्भुज मंदिर का निर्माण कराया। यह निश्चित हुआ कि शुभ मुर्हूत में मूर्ति को चतुर्भुज मंदिर में रखकर इसकी प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। जब रानी ओरछा पहुंची तो उन्होंने यह मूर्ति अपने महल में रख दी। बाद मैं मूर्ति वहां  से हिली नहीं प्रभु का चमत्कार मान मूर्ति को वही स्थापित कर दिया गया बाद मैं महल को ही मंदिर का रूप दे दिया गया और इसका नाम रखा गया राम राजा मंदिर। यह पूरी दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है। चतुर्भुज मंदिर आज भी वीरान पडा है। चतुरभुज  का  संस्कृत  मैं  अर्थ  है 4 भुजा  वाला  यह  मंदिर 7th Ad का  है एवं  भगवन  विष्णु  को  समर्पित  है चतुर्भुज मंदिर 344  फ़ीट ऊँचा है 67 सीडी चढ़ कर आप मंदिर तक पहुँच सकते है   


चतुर्भुज मंदिर







ओरछा झाँसी रेलवे स्टेशन से 18  किलोमीटर दूर है

Saturday, 30 May 2020

श्री कालेश्वर मंदिर हिमाचल

हिमाचल मैं छोटी काशी ,मंडी के बारे तो सब जानते है परन्तु हिमाचल मैं छोटा हरिद्वार भी है -यह कम ही लोग जानते है -- यह जगह हिमाचल के कांगड़ा देहरा के परागपुर गांव में स्थित है। पठानकोट से 123 किलोमीटर दूर - वाया अम्ब  होते आप यहाँ पर जा सकते है -प्रसिद्द शक्ति पीठ ज्वालाजी मंदिर से केवल 11  किलोमीटर दूर है छोटा हरिद्वार यहाँ  ब्यास नदी के किनारे बना है एक पुरातन मंदिर

श्री कालीनाथ कालेश्वर मंदिर


 मां चिंतपूर्णी के इर्द-गिर्द चारों तरफ रुद्र माह देव मंदिर है। उन्ही में से एक है कालेश्वर मंदिर।- लोक मान्यता अनुसार इस मंदिर का सम्बन्ध महाभारत काल मैं पांडवो के अज्ञातवास से जुड़ा है -यहां पर स्‍थापित शिवलिंग भी अपने आप में अद्वितीय है। महादेव की पिंडी भू-गर्भ में स्थित है। मान्यता है कि इस शिवलिंग में महाकाली और भगवान शिव दोनों का वास है। पौराणिक कथा अनुसार  मां काली ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए यह आकर अतिंम तपस्या की थी।  शिव कि जिस स्थान पर राक्षसों का खून नहीं गिरा होगा, वहीं मैं तुम्हें मिलूंगा। कालेश्वर मंदिर वही स्थान है। यहीं पर काली मां को शिव प्राप्त हुए थे।



 शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि यह हर साल एक जो के दाने के बराबर पालात में धंसता जा रहा है। कालेश्वर तीर्थ स्थल के पास प्राचीन पंचतीर्थी सरोवर भी है। मान्यता है की पांडव कुंभ के मेले मैं जाना चाहते थे परन्तु किसी कारन वश जा नहीं पाए पांडवों की मां ने जब स्नान की इच्छा जताई तो अर्जुन ने पहाड़ से पांच तीर मार कर मां गंगा को प्रकट किया। इस लिए इस जगह को पंज तीरथी भी कहा जाता है


 ब्यास नदी




 इसके समीप ही श्मशानघाट है जहां पर हिंदू धर्म के लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने आते हैं।
 पवित्र तीर्थ स्थल के दर्शनों के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर मैं कोई भीड़ भाड़ नहीं है- फ्री भोजन की व्यवस्था भी एक साधु द्वारा की जाती है - पास के बाजार मैं भी खाने पीने के प्रबंध है
महाशिवरात्रि पर यहां बड़े पैमाने पर मेला  लगता है।

अयोध्या-SRI RAM MANDIR

  सरयू नदी के तट पर बसी , ऐतिहासिक नगरी , प्रभु श्री राम की जन्मस्थली , मोक्षदायिनी अयोध्या , भारत के   सात पवित्र नगरों मे...