Monday, 22 June 2020

शुद्ध महादेव का मंदिर


शुद्ध महादेव का मंदिर

देवदार के घने जंगल, घुमावदार पहाडियाँ, लुभावने दृश्य और शांत वातावरण पटनीटॉप को पिकनिक के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं।पटनीटॉप 2024 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है, जिसके पास से चेनाब नदी बहती है।पटनीटॉप गए और शुद्ध महादेव मंदिर नहीं देखा, तो कुछ नहीं देखा- 


पटनीटॉप से
 42  किलोमीटर दूर है शुद्ध महादेव का अलौकिक मंदिर



शुद्ध महादेव मंदिर भोलेनाथ का ऐसा मंदिर है जहां पर उनका खंडित त्रिशूल स्थापित है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर से कुछ दूरी पर माता पार्वती की जन्म भूमि मानतलाई है



सुध महादेव मंदिर का निर्माण आज से लगभग 2800 वर्ष पूर्व  किया गया था



पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती रोज़ाना मानतलाई से इस मंदिर में पूजा करने आती थी  एक दिन सुधीत नाम के शिव भगत राक्षश को देखकर पार्वती कर डर चिल्ला पड़ी उनके चिल्लाने की आवाज़ कैलाश पर समाधि में लीन भगवान शिव तक पहुंची। शिव ने अपना त्रिशूल राक्षस की ओर फेंका। त्रिशूल आकर सुधांत के सीने में लगा शिव को तुरंत ही अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने राक्षस को उसका जीवन उसे फिर से देने की पेशकश की। राक्षश ने मोक्ष प्राप्त करने की माँग की। इस घटना के बाद ही इस स्थान का नाम सुध महादेव पड़ा। मंदिर परिसर में एक ऐसा स्थान भी है जिसके बारे में कहा जाता है की यहां सुधान्त दानव की अस्थियां रखी हुई है। ऐसा विश्वास है उसी त्रिशूल के तीन टुकड़े मंदिर परिसर में अभी भी गड़े हुए है। सबसे बड़ा त्रिशूल के ऊपर वाला हिस्सा ,मध्यम आकर वाला बीच का हिस्सा तथा सबसे छोटा सबसे नीचे का हिस्सा है इन त्रिशूलों के ऊपर किसी अनजान लिपि में कुछ लिखा हुआ है जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका। सबसे खास बात यह है की धुप ,बरसात ,सर्दी गर्मी का इसपर कोई असर नहीं हुआ  इसको आज तक जंग नहीं लगा भक्त लोग इनका रोज़ाना जलाभिषेक भी करते हैं।


मंदिर के बाहर बावड़ी है जिसमें पहाड़ों से 24 घंटे 12 महीनो पानी आता रहता है।

यहाँ बाबा रूप नाथ ने हजारों साल पहले समाधि ली थी। बाबा की धूनी  अभी भी लगातार जल रही है 


माता पार्वती की जन्म भूमि मानतलाई

 लोक मान्यता अनुसार  के प्रांगण मैं जो तालाब है वही पर माँ पार्वती भगवान शिव की शादी के लिए हवन कुंड बनाया गया था



शुद्ध महादेव से 6 किलोमीटर की दूरी पर देवदार के जंगलों से घिरा मानतलाई है । पौराणिक कथा के मुताबिक इसी जगह पर भगवान शिव ने पार्वती से शादी की थी ।












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